राजस्थान विधानसभा चुनाव को ठीक एक महीना बचा है। जनता अपने क्षेत्र से कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार जानने को उत्सुक है, लेकिन पार्टियों ने टिकट वितरण में पूरा धैर्य अपनाया हुआ है।
माना जा रहा है कि दीपावली तक दोनों पार्टियां इस धैर्य को बनाए रख सकती हैं। राजस्थान में एक से दो प्रतिशत के अंतर पर सरकारें बनती और बिगड़ती हैं। प्रत्याशी ही वे आधार हैं, जो मतदान के चंद प्रतिशत बढ़ा या घटा सकते हैं।
प्रत्याशियों का नाम सामने आते ही, मतदाता अपना अचूक हथियार यानी मतदान का प्रयोग करेंगे, जो एक या दो प्रतिशत कम या ज्यादा रहा, तो प्रत्याशियों की किस्मत बदल देगा।
दो प्रतिशत मतदान, दो दर्जन सीटें
राजस्थान में दोनों मुख्य पार्टियों को मतदान के एक से दो प्रतिशत की चिंता है। बारीकी से देखा जाए, तो एक प्रतिशत मतदान के कम-ज्यादा होने से ही दर्जनभर सीटें प्रभावित हो जाती हैं।
राजस्थान में दो प्रतिशत मतदान ही करीब दो दर्जन सीटों का अंतर ला देता है, जो किसी को सत्ता सुख भोगने का आनन्द दिलाता है, तो किसी के सत्ता के सपनों को चूर-चूर कर देता है।
अब 200 सीटों की विधानसभा में 24 सीटें मायने रखती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में दो प्रतिशत मतदान के अंतर ने करीब 30 सीटों को प्रभावित कर दिया था।
पार्टियों की नजर में कम प्रतिशत से हार-जीत तय करने वाली सीटों की संख्या अधिक है।
इन सीटों पर प्रत्याशी चयन है चुनौती
पार्टियों को ऐसी ही सीटों पर प्रत्याशियों के चयन में परेशानी हो रही है। इस बार मुकाबला भी कांटे का है। पार्टियों का प्रयास है कि इन ढाई दर्जन सीटों में से अधिक से अधिक सीटें झोली में आएं, जिससे सत्ता पाई जा सके। पार्टियां इन सीटों पर प्रत्याशियों का चयन करने को लेकर सभी तरह के गणित लगा रही हैं।
एक वोट से हारे थे जोशी
एक प्रतिशत से भी मतदान के अंतर से हार-जीत जनता के लिए भले ही रोचक हो, लेकिन प्रत्याशियों के लिए पीड़ादायी होती है।
पिछले चुनाव में नाथद्वारा सीट से केन्द्रीय मंत्री सीपी जोशी केवल एक मत के अंतर से से हारे थे। ऐसी 14 सीटों पर कुछ ऐसा ही रोचक मुकाबले देखने को मिला था। अब पार्टियों की इन सीटों पर बारीकी से नजर है।
पिछले चुनाव में 2 प्रतिशत से कम मतदान अंतर से हार-जीत तय करने वाली वाली सीटें
भाजपा जीती - नाथद्वारा, लाड़पुरा, भीम, अजमेर उत्तर, खाजूवाला, डेगाना, करौली, थानागाजी, जहाजपुर, परबतसर, आदर्शनगर, मारवाड़ जंक्शन, धौलपुर, कठूमर, झोटवाड़ा, शेरगढ़
कांग्रेस जीती - लक्ष्मणगढ़, चौमूं, नसीराबाद, हनुमानगढ़, पोकरण, मंडावा, हवामहल, बेंगू, डग, जमवारामगढ़, हिण्डैन