जैसलमेर के बाशिंदों की लगन व मेहनत का नमूना है कि रल्ली आज विदेशों में भी अपनी धाक जमा रही है। घर में पुराने कपड़ों के टुकड़ों से बनाई जाने वाली यह रल्ली पर्यटकों की भी खास पसन्द बन चुकी है। दरअसल यह रल्ली बैठने व बिस्तर पर बिछाने के लिए बैड शीट के रूप में बनाई जाती है।
यहां महिलाएं घर के उपयोग के लिए रल्ली बनाती थी, लेकिन अब इसे बड़े स्तर पर भी व्यापार का रूप मिलने लगा है। इसके लिए वन विभाग के इंदिरा गांधी नहर परियोजना स्टेज द्वितीय के प्रयास कारगर हुए हैं। विभाग ने पहले जैसलमेर, जोधपुर व झालावाड़ में इसकी प्रदर्शनी लगाई। जहां अच्छा रेस्पोंस मिलने के बाद अब इसे बाड़मेर के एक एनजीओ के सहयोग से जर्मनी में टेक्सटाइल फेयर में प्रदर्शित किया गया। इस फेयर में रली को 20 से अधिक देशों के लोगों ने सराहा और ऑर्डर भी दिए हैं।