नागौर में सड़क दुर्घटना के एक बहुचर्चित मामले में न्याय की जीत हुई है। जायल स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विकास राम चौधरी की अदालत ने 5 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित परिवार को 1 करोड़ 11 लाख 14 हजार 226 रुपये का मुआवजा चुकाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही दावा याचिका दायर करने की तिथि से राशि के भुगतान तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने के निर्देश दिए हैं।
निरीक्षण पर जाते समय हुआ था दर्दनाक हादसा
यह दुर्घटना 21 अप्रैल 2021 को हुई थी। नागौर जिला परिषद में पंचायत प्रसार अधिकारी के पद पर कार्यरत अशोक कुमार सैन अपनी मोटरसाइकिल से मुंडवा निरीक्षण के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक अनियंत्रित बस ने उनकी बाइक को भीषण टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
कोर्ट ने आय और आश्रितों को आधार बनाकर तय किया मुआवजा
अदालत ने 19 पन्नों के अपने विस्तृत आदेश में मृतक की मासिक आय, शेष सेवा अवधि और आश्रितों की संख्या को ध्यान में रखते हुए मुआवजे का निर्धारण किया। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ओमप्रकाश सैन के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम के तहत नागौर जिले का यह पहला मामला है, जिसमें न्यायालय ने 1 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा स्वीकृत किया है।
7 सदस्यों के बीच इस तरह बांटी जाएगी राशि
अदालत ने परिवार के भरण-पोषण को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि का पारदर्शी विभाजन किया है। 40% हिस्सा मृतक की पत्नी सुमन को दिया जाएगा। 10-10% हिस्सा दोनों पुत्रियों, दो नाबालिग बच्चों तथा वृद्ध माता शांति देवी और पिता हनुमानराम को मिलेगा।
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सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए बनी मिसाल
यह ऐतिहासिक फैसला न केवल अशोक कुमार सैन के परिजनों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा, बल्कि सड़क हादसों में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों के कानूनी अधिकारों को भी मजबूती देगा। साथ ही, मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजा दावों में यह फैसला एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।