प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रामसिंह कस्वां ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस ने भाजपा के भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया जिसे जनता का समर्थन मिला। कांग्रेस के इस कैंपेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह तक काउंटर नहीं कर सके।
इधर, सचिन पायलट बीते दिनों अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। इससे ऐसा लगा जैसे पायलट ने भाजपा का साथ देने के लिए ये धरने का नाटक किया हो। जबकि तथ्य ये है कि राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने देश में सर्वाधिक कार्रवाई की हैं। करीब 1750 अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है. जिला कलेक्टर, एसपी, RPSC सदस्य तक को भ्रष्टाचार करने पर बख्शा नहीं गया।
सचिन पायलट की इन्हीं पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उन्हें कर्नाटक में स्टार प्रचारक नहीं बनाया गया, जबकि इससे पहले हर जगह वो स्टार प्रचारक बनाए जाते थे, पार्टी नेतृत्व भी संभवत: इनकी चाल समझ गया कि ये 40% कमीशन के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए किस प्रकार भाजपा का साथ दे रहे हैं। 10 मई को कर्नाटक में वोटिंग होनी थी और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जनता कांग्रेस के साथ थी। वोटिंग से एक दिन पहले पायलट ने प्री-प्लांड तरीके से प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाए, जबकि सचिन पायलट जानते थे कि 10 मई को प्रधानमंत्री राजस्थान के दौरे पर आ रहे हैं और कर्नाटक में वोटिंग के समय भाजपा को इस कथित जनसंघर्ष यात्रा का लाभ मिलेगा। ये प्रेस वार्ता और यात्रा की घोषणा पूरी तरह भाजपा का षड़यंत्र है जिसमें पायलट शामिल हैं।
बिहार में कांग्रेस-RJD-JDU गठबंधन के खिलाफ भाजपा की शह पर काम कर रहे प्रशांत किशोर ही भाजपा की मदद से सचिन पायलट के साथ काम कर रहे हैं। जिससे भाजपा को राजस्थान में लाभ हो जिन मुद्दों की बात सचिन पायलट कर रहे हैं वो सबसे पहले मैंने उठाए थे और अदालत तक में इन मुद्दों पर वसुंधरा राजे और उनकी सरकार से लड़ाई लड़ी थी। पायलट ने इन मुद्दों पर लड़ाई में मेरी कोई मदद नहीं की। 11 जून 2016 को राजेश पायलट की पुण्यतिथि के दिन मैं पायलट के जालूपुरा स्थित आवास पर गया।
मैंने उनसे इन मुकदमों में मदद करने का आग्रह किया तब सचिन पायलट ने कहा कि मैं थोड़ा भी वसुंधरा के खिलाफ बोलता हूं तो मेरे ऊपर बड़ा दबाव आता है, क्योंकि मेरे उनसे मधुर पारिवारिक संबंध हैं, इसलिए मैं वसुंधरा जी के खिलाफ नहीं बोल सकता। मैंने कहा कि आप इतने बड़े राजनेता के पुत्र होकर भी बोलने से डर रहे हैं, मैं तो उनके खिलाफ लड़ रहा हूं, तब भी उन्होंने किसी भी मदद से इंकार कर दिया। करीब 30-35 मिनट की इस मुलाकात में मैंने कई बार आग्रह किया परन्तु उन्होंने कोई मदद नहीं की।
अब साढ़े चार साल बाद अचानक पायलट ये मुद्दे उठा रहे हैं। ये दिखाता है कि वो भाजपा की मदद से कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए ये मुद्दे उठा रहे हैं जबकि इन सब मुद्दों का अदालत से निराकरण हो चुका है।