क्यों जताई जा रही यह संभावना
राजस्थान में दलितों की आबादी करीब 17 फीसदी है। प्रदेश में 34 सीटें एससी के लिए रिजर्व हैं। खास बात यह है कि इन सीटों पर कांग्रेस की स्थित मजबूत हैं। 34 में से 19 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में मल्लिकार्जुन खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस प्रदेश की दलित सीटों पर और मजबूत हो सकती है।
एससी की 12 सीटों पर भाजपा
प्रदेश की एससी के लिए रिजर्व 34 सीटों में से 19 पर कांग्रेस और 12 सीटों पर भाजपा काबिज है। इसके अलावा आरएलपी का दो और एक सीट पर निर्दलीय विधायक का कब्जा है। 2018 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 34 एससी सीटों पर 77 लाख 74 हजार 38 वोटर थे। 2023 के विधानसभा चुनाव में यहां और अधिक वोटर बढ़ेंगे। ऐसे में दोबार सत्ता में आने का प्रयास कर रही कांग्रेस के लिए दलित वोटर महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
ये हैं एससी की रिजर्व सीटें
जयपुर में चाकसू, दूदू, बगरू, नागौर में जायल और मेड़ता, जोधपुर में भोपालगढ़ और बिलाड़ा, गंगानगर में अनूपगढ़ और रायसिंहनगर, भरतपुर में बयाना और वैर, अलवर में कठ्ठुमर और अलवर ग्रामीण में 2-2 एससी की रिर्जव सीटें हैं। इसके अलावा अजमेर दक्षिण, बारां-अटरू, चौहट्टन, शाहपुरा, खाजूवाला, कपासन केशवरायपाटन, सुजानगढ़, सिकराय, बासेरी, पीलीबंगा, जालौर, डग, पिलानी, हिंडौन सिटी, रामगंज मंडी, सोजत, धौद, रेवदर, निवाई और खंडार सीटें एससी रिजर्व सीटें हैं।
खरगे के जरिए दलित समुदाय को साधेगी कांग्रेस
राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं। अशोक गहलोत राजस्थान मॉडल को प्रचारित कर प्रदेश में एक बार फिर सरकार बनाने की बात कह रहे हैं। ऐसे में खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी दलित समुदाय पर प्रभाव डालने का प्रयास करेगी। कहा जा रहा है कि खरगे राजस्थान में कांग्रेस को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।