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Udaipur: धार्मिक झंडियां लगाने पर कलेक्टर की रोक, BJP बोली- महाराणा प्रताप की धरती पर भगवा झंडे पर रोक क्यों?

Thu, 06 Apr 2023 05:33 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर

सार

उदयपुर जिला कलेक्टर ने अगले 2 महीने तक पूरे जिले में सार्वजनिक स्थल और अन्य व्यक्ति की संपत्ति पर धार्मिक झंडे और प्रतीक चिन्ह लगाने पर रोक लगाकर धारा 144 लागू कर दी है। इसे बीजेपी ने तुष्टीकरण और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हनन बताकर विरोध किया है।
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कलेक्टर के आदेश का हो रहा विरोध। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उदयपुर में किसी भी सार्वजनिक बिल्डिंग या बिजली के खंभे समेत सार्वजनिक स्थल या किसी अन्य व्यक्ति के घर-सम्पत्ति पर अब बिना अनुमति धार्मिक चिन्ह वाली झंडियां नहीं लगाई जा सकेंगी।  जिला कलेक्टर ने धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। जिसका बीजेपी ने विरोध किया है। दरअसल उदयपुर में कुछ दिन पहले ही बागेश्वर धाम के महंत धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर बवाल हो गया था । जिसमें धीरेंद्र धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उदयपुर के कुंभलगढ़ किले से हरे झंडे हटाने और उसकी जगह भगवा झंडे लगाने को लेकर संबोधन दिया था। उसके बाद कुछ लोग किले पर पहुंच भी गए थे और भगवा झंडा लगाने की कोशिश की थी। तब पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।
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क्या है उदयपुर कलेक्टर का आदेश ?
उदयपुर कलेक्टर ताराचंद मीणा ने ज़िले में धार्मिक झण्डियों पर अगले 2 महीने के लिए रोक लगा दी है। धार्मिक प्रतीक चिन्ह वाली झण्डियां लगाने पर प्रतिबंध लगाते हुए निषेधाज्ञा धारा 144 लगा दी है। कलेक्टर ने आदेश में लिखा है कि उदयपुर पुलिस अधीक्षक ने अवगत कराया है कि उदयपुर जिले में आयोजित होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान धार्मिक प्रतीक चिन्ह युक्त उदयपुर जिला कलेक्टर ने जिले में धारा 144 लगा दी है कलेक्टर ने आदेश में लिखा है कि उदयपुर पुलिस अधीक्षक ने है अवगत कराया कि उदयपुर जिले में आयोजित होने वाले धार्मिक पर आयोजनों के दौरान धार्मिक प्रतीक चिन्ह युक्त झण्डियां सार्वजनिक संपत्ति जैसे- राजकीय भवन , राजकीय उपक्रम, बोर्ड, निगम के भवन, सार्वजनिक और सामुदायिक भवन , विश्रामगृह, सार्वजनिक पार्क ,चौराहे ,तिराहे पर निर्मित सर्किल, बिजली और टेलीफोन के खंभे (पोल) या अन्य व्यक्तियों की संपत्ति पर बिना सक्षम स्वीकृति या सहमति के लगाकर व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर संप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है। जिससे लोक शांति भंग होने और कानून व्यवस्था, सामाजिक सद्भाव प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में सामाजिक सद्भाव और लोक शांति बनाए रखने के लिए तत्काल निरोधात्मक कार्रवाई करना जरूरी है।

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आगामी 2 महीने तक उदयपुर जिले में निषेधाज्ञा आदेश प्रभावी
कलेक्टर ने आदेश में कहा है कि इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए उदयपुर जिले के संपूर्ण नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में सार्वजनिक संपत्तियों या अन्य व्यक्ति की संपत्ति पर बिना सक्षम स्वीकृति या सहमति के धार्मिक प्रतीक चिन्ह युक्त झंडे लगाने पर प्रतिबंध लगाने के लिए निषेधाज्ञा लागू करता हूं। जिला कलेक्टर ने कहा है कि मैं सभी नागरिकों को इस आदेश की पालना करने और उल्लंघन नहीं करने के निर्देश देता हूं। अगर कोई व्यक्ति इस प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करेगा, तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत अभियोजित किया जा सकेगा। क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में इस आदेश की व्यक्तिगत पालना कराया जाना संभव नहीं है, इसलिए एक पक्षीय आदेश जारी करके सर्वसाधारण की जानकारी के लिए उदयपुर जिले की संपूर्ण सीमा- शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में मुख्य-मुख्य स्थानों पर इस आदेश को चस्पा कर ध्वनि प्रसार यंत्रों और समाचार पत्रों के माध्यम से प्रचार-प्रसार कर नागरिकों को सूचित किया जाए। यह आदेश 5 अप्रैल 2023 से आगामी 2 महीने तक उदयपुर जिले के संपूर्ण नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में प्रभावी रहेगा।

मेवाड़ महाराणा प्रताप की धरती, भगवा झंडे लगाने पर रोक क्यों ? -सीपी जोशी
उदयपुर में धार्मिक झंडे लगाने पर रोक के प्रशासन के फरमान पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा- मेवाड़ महाराणा प्रताप की धरती है । वहाँ पर भगवा झंडे लगाने पर रोक क्यों लगाई है ? उन्होंने कहा भगवा झंडे में क्या गलत है ? सरकार बताए। जोशी ने कहा गहलोत सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करे। 
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तुष्टिकरण और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के हनन का प्रयास-दीया कुमारी
राजसमंद से बीजेपी सांसद दीया कुमारी ने कहा- " धर्म ध्वजा के विरुद्ध उदयपुर प्रशासन का यह आदेश राजस्थान की कांग्रेस सरकार की तुष्टीकरण की नीति का ताजा उदाहरण है। यह कानून व्यवस्था के नाम पर आम जन की धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के हनन का प्रयास है।"

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