चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ दुग्ध उत्पादक संघ (चित्तौड़ डेयरी) में वेतन बढ़ोतरी में भेदभाव का मामला सामने आने के बाद बुधवार को ठेका श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन किया। श्रमिकों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों का वेतन मनमाने ढंग से बढ़ा दिया गया, जबकि बाकी कर्मचारियों को इस वृद्धि से वंचित रखा गया। इसके चलते असंतोष बढ़ा और 200 से अधिक श्रमिकों ने काम छोड़कर प्लांट और कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
चित्तौड़ डेयरी में करीब 250 ठेका श्रमिक कार्यरत हैं। जानकारी के अनुसार डेयरी के पूर्व एमडी के स्थानांतरण के दौरान कुछ कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी कर दी गई, जबकि बाकी कर्मचारियों को इस वृद्धि का लाभ नहीं मिला। इससे बाकी ठेका श्रमिकों में नाराजगी फैल गई और उन्होंने वेतन में समान बढ़ोतरी की मांग उठाई।
बुधवार को श्रमिकों ने एकजुट होकर काम रोक दिया और चित्तौड़ डेयरी के चेयरमैन बद्री जाट जगपुरा से मुलाकात कर अपनी समस्या से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने गलत तरीके से कागजों में हेरफेर कर अपनी तनख्वाह बढ़ा ली, जबकि बाकी श्रमिकों की अनदेखी की गई।
प्रदर्शन के दौरान चेयरमैन बद्री जाट जगपुरा ने मौके पर ही चित्तौड़ डेयरी की एमडी से फोन पर बात की और उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केवल 10-12 कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की गई है, जिससे बाकी कर्मचारियों में असंतोष है।
एमडी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए श्रमिकों को आश्वस्त किया कि वेतन बढ़ोतरी में किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सभी श्रमिकों के वेतन में समान रूप से बढ़ोतरी की जाएगी और जिन कर्मचारियों ने अनुचित तरीके से वेतन बढ़वाया है, उनकी सैलरी अगले महीने से कम कर दी जाएगी।
चित्तौड़ डेयरी पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रही है। इससे पहले भी श्रमिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर डेयरी प्रशासन पर आरोप लगते रहे हैं। इस बार वेतन बढ़ोतरी में भेदभाव और आर्थिक शोषण के आरोपों ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन अपने आश्वासन को कितना कारगर तरीके से लागू करता है और ठेका श्रमिकों की नाराजगी को दूर करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।