फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Navratri 2025 : यहां तीन रूपों में विराजमान हैं 'जोगणिया माता', तीन ओर से पहाड़ियों से घिरा है मां का धाम

Fri, 26 Sep 2025 08:02 AM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़

सार

Shardiya Navratri 2025 : नवरात्रि का पावन पर्व हर दिन के साथ आगे बढ़ रहा है। मां के उपासक अपनी साधना और आराधना में जुटे हुए हैं। चलिए इस खास मौके पर आपको बता रहे हैं मेवाड़ के शक्तिपीठों में शामिल मां जोगणिया माता  के मंदिर की कहानी। 
विज्ञापन
Shardiya Navratri 2025 : जोगणिया माता के मंदिर में जुटी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नवरात्रि पर मां के धाम और मंदिरों की महिमा और भी बढ़ जाती है। मां की भक्ति और आराधना के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। तो चलिए इस खास अवसर आज बात करते हैं राजस्थान के चित्तौणगढ़ स्थित जोगणिया माता मंदिर की।  नवरात्रि के पावन अवसर पर मेवाड़ के शक्तिपीठों में जोगणिया माता मंदिर का नाम खास रूप से लिया जाता है। इस मंदिर में देवी दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती तीनों रूपों में विराजमान हैं। राजस्थान ही नहीं, बल्कि समीपवर्ती मध्य प्रदेश और गुजरात के लाखों श्रद्धालु माता जोगणिया की आराधना करने यहां पहुंचते हैं। इन दिनों तो मां के जयकारों की गूज सुनाई दे रही है चारों तरफ। 

विज्ञापन

 

 

प्राकृतिक सौंदर्य मां के धाम को बनाता है और भी खूबसूरत। - फोटो : अमर उजाला
ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से तीन ओर से घिरा है मंदिर
अरावली पर्वतमाला की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों से तीन ओर से घिरा यह प्राचीन मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। एक ओर गहरी खाई और दूसरी ओर फैला हुआ घना जंगल इसकी आध्यात्मिकता को और भी रहस्यमय बना देता है।

300 फीट गहरे दर्रे में झरना गिरता है
बरसात के मौसम में मंदिर से नीचे लगभग 300 फीट गहरे दर्रे में झरना गिरता है और बरसाती नदी प्रवाहित होती है। मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर दो विशाल सिंह की प्रतिमाएं स्थापित हैं, मानो स्वयं माता की रक्षा कर रही हों। समीप बने मंडप में प्राचीन सहस्त्र शिवलिंग विराजमान है, जो श्रद्धालुओं को शिव-शक्ति का अद्भुत संगम का आभास कराता है।

Navratri 2025 : जोगणिया माता मंदिर का धाम। - फोटो : अमर उजाला
यहां अनूठी परंपरा, हथकड़ी चढ़ाना
इस मंदिर की सबसे विशेष परंपरा है हथकड़ी चढ़ाना। मान्यता है कि यदि कोई व्यक्ति जेल या पुलिस की गिरफ्त से मुक्त होने की कामना माता से करता है और उसकी मनोकामना पूर्ण होती है, तो वह गुप्त रूप से आकर मंदिर में हथकड़ी चढ़ा देता है। इस विश्वास के चलते यहां मंदिर की दीवारों और कोनों में हथकड़ियां लटकी देखी जा सकती हैं। यह परंपरा माता की न्यायकारी शक्ति और भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक मानी जाती है।

 

Navratri 2025 : जोगणिया माता मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
जोगणिया माता मंदिर का इतिहास
जोगणिया माता मंदिर का इतिहास 8वीं-9वीं शताब्दी तक जाता है। माना जाता है कि आरंभ में यह अन्नपूर्णा देवी का मंदिर था। एक किंवदंती के अनुसार, हाड़ा शासक बंबावदागढ़ की कठिन परिस्थितियों के समय देवी ने एक जोगिन का रूप धारण किया और बाद में सुंदर स्त्री स्वरूप में प्रकट हुईं। इस लीला के कारण वे "जोगणिया माता" के नाम से विख्यात हुईं। हाड़ा चौहान शासकों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया और तब से यह उनकी कुलदेवी के रूप में पूजित है।
विज्ञापन

Navratri Vibes : मां का सुंदर रूप। फूल माला से सजी हुईं मां। - फोटो : अमर उजाला
नवरात्र विशेष 
नवरात्रि के पावन दिनों में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच वातावरण "जय माता दी" के उद्घोष से गूंज उठता है। मां के दरबार में दीपों की ज्योति, भजन–कीर्तन और आस्था की लहर हर भक्त के हृदय को भक्ति रस से भर देती है।

ये भी पढ़ें- रिपोर्ट में दावा: इस त्योहारी सीजन में दो लाख लोगों को मिल सकती हैं नौकरियां; ज्यादातर भर्तियां छोटे शहरों में


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें