बच्चों ने बनाई क्रिएटिव चीजें।
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सिंघाना ब्लॉक के गुजरवास की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्र-छात्राओं के खेल-खेल में बौद्धिक और शारीरिक विकास हो ऐसी शानदार पहल गांधी फेलो के युवक और युवती ने की है। स्कूल के अंदर जाते ही ऐसा महसूस होता है कि छात्र-छात्राओं के लिए खेलने के लिए अलग-अलग प्वाइंट बना रखे हैं तथा उनसे बच्चे खेलते हुए भी दिखाई देंगे तथा दीवारों पर भी ज्ञानवर्धक चीजों की चित्रकारी की हुई है। यह सब गांधी फेलो के आशीष मलिक व शुभम नांद्रे द्वारा की गई है। चित्रकारी व खेलने के साधन कम खर्चे में छात्र छात्राओं को उपलब्ध करवाने वाले युवक युवती ने बताया कि बच्चों के खेलने के मैदानों में हर बच्चे को मुफ्त में सुविधाएं मिलनी चाहिए तथा कम खर्चीली भी होनी चाहिए। इसके लिए हमने पुराने टायरों और पुरानी चीजों से ही बच्चों के लिए खेलने की चीजें बना दीं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने की इनोवेशन की सराहना
छह महीने पहले कार्यक्रम के उद्घाटन में एसडीएम बुहाना सुनील कुमार चौहान, नीलिमा यादव सीबीईओ सिंघाना, प्रधानाचार्य अजीत राव सीनियर सेकेंडरी स्कूल वि गुजरवास, सिंघाना उपप्रधान सरला देवी, शेर सिंह आरपी सीबीईओ ऑफिस सिंघाना ने सराहना करते हुए कहा कि ऐसे उपक्रम सभी स्कूलों में होने चाहिए। जिससे विद्यार्थियों को नई कला सीखने के अवसर मिल सके और बच्चों की प्रतिभाओं को विकसित किया जा सकता है। इस नवाचार को सफलतापूर्वक स्थापित करने के लिए एमआरएफ टायर्स विक्रेता संदीप यादव और होंडा स्कूटी विक्रेता सुरेश कुमार सिंघाना का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बच्चे इन रंगीन और अभिनव खेल के मैदान को पसंद कर रहे हैं जो सुरक्षित हैं, क्योंकि इनमें कोई नुकीला किनारा नहीं है। इससे बच्चों को खेलने के अपने तरीके डिजाइन करने और अपनी रचनात्मकता और कल्पना का उपयोग करने की सुविधा मिलती है।
स्कूल में पुराने टायरों से बनाया गया कैलकुलेटर
गुजरवास की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में एक नई पहल को प्रधानाचार्य अजीत राव के सहयोग से नई दिशा मिली। जिसमें पुराने टायर की मदद से संरचनाएं बनाई गई। जिसमें कैलकुलेटर, हाथी, सी सॉ, मोटरसाइकिल और जेब्रा जैसी संरचनाएं शामिल हैं, जिससे बच्चे गणित, हिंदी की गतिविधियां कर पाएंगे और 21 वी सदी के कौशल से रूबरू हो पाएंगे। इसमें रचनात्मकता, समस्या समाधान, संचार कौशल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच शामिल है। इन पर बच्चे खेल का अपना बौद्धिक विकास कर रहे हैं। इन कार्यों को पूरा करने के लिए लोगों ने उत्साह पूर्ण भागीदारी दर्शाते हुए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता भी करवाई।
खेतड़ी के गाडराटा स्कूल में खेलने के लिए किया कायाकल्प
गांधी फेलो के आशीष मलिक और शुभम नांद्रे ने बताया गुजरवास से पहले खेतड़ी के गाडराटा में भी कम खर्चे में पुराने कबाड़ में पड़े साधनों से खेलने की चीजें उपलब्ध करवाई गई थीं। स्कूलों के अंदर पुराने टायरों व अन्य चीजों से बनाए हुए खेलने के साधन होने पर बच्चों को खेलने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।