हैदराबाद में सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराए जाने पर एक ओर पुलिस के इस कारनामे पर वाहवाही हो रही है वहीं कई लोग इसपर सवाल उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है। जोधपुर में एक कार्यक्रम में जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि न्याय कभी भी तत्काल में नहीं किया जाना चाहिए, न्याय कभी भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर न्याय बदले की भावना से किया जाए तो यह अपना मूल चरित्र खो देता है।
गौरतलब है कि हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत करने वाले चारों आरोपियों को पुलिस ने शुक्रवार को मुठभेड़ में मार गिराया। तेलंगाना पुलिस के अनुसार आरोपियों को राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्ट करने के लिए ले जाया गया था। इस दौरान आरोपियों ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उनपर गोलियां चला दीं। इस मुठभेड़ में चारों आरोपियों की मौके पर ही मौत हो गई।
तेलंगाना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पशु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म के बाद उसे जलाकर मारने के चारों आरोपियों के शवों को नौ दिसंबर की रात आठ बजे तक सुरक्षित रखा जाए। हाईकोर्ट ने यह आदेश मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय को इस मामले में न्यायिक दखल देने के अनुरोध पर दिया। इसमें आरोप लगाया गया है कि चारों की हत्या गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने आरोपियों के पोस्टमार्टम का वीडियो सीडी फार्म या फिर पेन ड्राइव में महबूबनगर के प्रधान जिला जज को सौंपने को भी कहा। साथ ही प्रधान जिला जज को सीडी या पेन ड्राइव लेने और इसे शनिवार शाम तक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को देने का निर्देश दिया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मुठभेड़ के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने फौरन ही एक टीम तेलंगाना के लिए रवाना कर दी थी, जो तथ्यों की पड़ताल करेगी। यह टीम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की अगुवाई में बनाई गई है। टीम जांच पूरी कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगा। आयोग ने कहा है कि देशभर में दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के बढ़ते मामलों का पहले ही संज्ञान लेकर राज्य महिला आयोगों और पुलिस प्रमुखों समेत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से इस तरह के मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। उधर, इस मामले में केंद्र सरकार ने भी हिरासत में हुए मुठभेड़ पर तेलंगाना सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। संसद के सत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने और मामले की संवेदनशीलता के चलते सरकार तथ्यों के साथ पूरी तैयारी रखने के लिए मामले पर पैनी निगाह बनाए हुए है।