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Rajasthan: एनसीबी से बचने बंटी को छिपाया, फिर दी दर्दनाक मौत, बुआ के बेटे की खौफनाक साजिश का दो साल बाद खुलासा

Mon, 29 Aug 2022 10:56 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर

सार

आरोपियों ने 1 फरवरी 2020 को नारकोटिक्स (NCB) टीम के छापे के बाद बंटी को एक कमरा किराए पर दिलाकर छिपा दिया था। एक साल से ज्यादा समय तक आरोपी उसे इसी तरह छिपाए रहे। इस बीच एनसीबी ने बंटी से पूछताछ करने के लिए सम्मन जारी कर दिया। जिसके बाद से आरोपी डर गए और उन्होंने उसकी हत्या की साजिश रच डाली।
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पुलिस गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के भरतपुर जिले में एक साल पहले बंटी चौधरी हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। वह थाना कुम्हेर इलाके के सैंत गांव में रहने वाला था। पुलिस ने हत्या के मामले में मृतक के बुआ के बेटे हरिमोहन उर्फ योगी जाट पुत्र वीरी सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि नशीली दवाओं के कारोबार में नाम उजागर होने के डर से फुफेरे भाई हरिमोहन ने अपने चचेरे भाई गोपी के साथ मिलकर मामा के बेटे बंटी की हत्या की थी। हत्या के लिए उनकी फर्म के दो अन्य पार्टनर ने 2.50 लाख रुपये भी दिए थे। 

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भरतपुर एसपी श्याम सिंह ने बताया कि 23 जून 2021 को थाना कुम्हेर क्षेत्र के सैंत गांव के पेट्रोल पंप के पास खेतों में बंटी चौधरी की लाश मिली थी। करीब 14 महीने बाद ब्लाइंड मर्डर का खुलासा कर आरोपी हरिमोहन को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में हरिमोहन ने बताया कि उसने अपने सहयोगी धीरज खंडेलवाल और कमलदीप उर्फ कमलजीत मौर्य के साथ मिलकर बंटी चौधरी के नाम पर मैसर्स राजस्थान ट्रेडर्स नाम से थोक दवाई विक्रेता की फर्म खोली थी। यह लोग दिल्ली स्थित दवा निर्माता कंपनी में मैसर्स न्यूटेक हेल्थ केयर नारेला से नशीली दवाइयां मंगवा कर राजस्थान के कई जिलों में सप्लाई करते थे।  

बंटी की तरह ही उन्होंने मनीष परिहार नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर जयपुर में मैसर्स यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स नाम से एक और फर्म खोली थी। इन दोनों फर्मों के जरिए नशीली दवाओं का कारोबार किया जा रहा था। 1 फरवरी 2020 को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो कोटा की टीम ने मैंसर्स यूनिवर्सल डिस्ट्रीब्यूटर्स पर छापा मारा। इस दौरान सोडियम, ट्रामाडोल, अल्प्राजोलम की लाखों टेबलेट जब्त की गईं थीं। कार्रवाई की भनक लगते ही मनीष परिहार, बंटी चौधरी, धीरज खंडेलवाल, कमलजीत और हरिमोहन जयपुर से फरार हो गए। बाद में मनीष परिहार पकड़ा गया।  
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राजस्थान ट्रेडर्स फर्म के सारे कागज बंटी चौधरी के नाम पर थे। ऐसे में आरोपियों को डर सताने लगा कि कहीं बंटी पकड़ा गया तो उन सब के नाम भी उजागर हो जाएंगे। ऐसे में तीनों ने बंटी की हत्या का प्लान बनाया। इसके लिए धीरज खंडेलवाल और कमलजीत ने हरिमोहन को ढाई लाख रुपये भी दिये। हरिमोहन ने बंदी की हत्या के प्लान में अपने चचेरे भाई गोपी को साथ मिलाया। योजना के अनुसार वह शराब पीने के बहाने बंटी को बाइक पर बैठाकर सैंत के जंगल में ले गए और फिर मारपीट कर पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।  

एसपी श्याम सिंह ने बताया कि आरोपियों ने 1 फरवरी 2020 को नारकोटिक्स टीम के छापे के बाद बंटी को कुम्हेर में एक कमरा किराए पर दिलाकर छिपा दिया था। आरोपी हर महीने उसे 10 हजार रुपये देते थे। करीब एक साल से ज्यादा समय तक आरोपी उसे इसी तरह छिपाए रहे। इस बीच एनसीबी ने बंदी से पूछताछ करने को लेकर सम्मन जारी कर दिया। जिसके बाद से आरोपी और डर गए, बंटी उनके लिए चिंता का विषय बन गया था। जिसके बाद आरोपियों ने उसकी हत्या का प्लान बनाया। 

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