बहुजन समाज पार्टी (बसपा) कांग्रेस पार्टी के साथ राजस्थान में छह बसपा विधायकों के विलय के खिलाफ कल राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी। इससे पहले, भाजपा विधायक मदन दिलावर ने बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के खिलाफ उनकी शिकायत पर राज्य विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में मंगलवार को एक नई याचिका दायर की।
हाईकोर्ट ने सोमवार को दिलावर की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह अब निरर्थक हो गई है क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष ने दिलावर की शिकायत पर आदेश पारित कर दिया था।
भाजपा विधायक ने इस याचिका में मार्च में दायर उनकी शिकायत पर अध्यक्ष द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर सवाल उठाए थे। इस शिकायत में उन्होंने बसपा के सदस्यों को विधान सभा की सदस्यता के अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया था क्योंकि संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा दो के तहत वे अयोग्य हो गए थे।
दिलावर ने मंगलवार को दायर नई याचिका में उनकी शिकायत पर विधानसभा अध्यक्ष के 24 जुलाई को दिए आदेश की वैधता और सटीकता को चुनौती दी है। दिलावर ने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष ने फैसला सुनाते समय उनकी बात नहीं सुनी। विधायक ने सोमवार को आदेश की प्रति की मांग करते हुए विधानसभा सचिव के कक्ष में धरना दिया था।
गौरतलब है कि 2018 के चुनाव में संदीप यादव, वाजिब अली, दीपचंद खेरिया, लखन मीणा, जोगेंद्र अवाना और राजेंद्र गुधा बसपा के टिकट पर जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। उन्होंने पिछले साल 16 सितंबर को कांग्रेस में एक समूह के रूप में विलय के लिए अर्जी दी थी। विधानसभा स्पीकर ने अर्जी के दो दिन बाद आदेश जारी कर घोषित किया कि इन छह विधायकों से कांग्रेस के अभिन्न सदस्य की तरह व्यवहार किया जाए।
इस विलय से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को मजबूती मिली और 200 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस सदस्यों की संख्या बढ़कर 107 हो गई। इससे पहले , भाजपा विधायक ने शुक्रवार को राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर बसपा के छह विधायकों के कांग्रेस में विलय को रद्द करने का अनुरोध किया था।