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राजस्थान के आठ जिलों में ब्लैकआउट: 10-15 मिनट बिजली गुल, कई जगहों पर सायरन बजते ही पहुंचीं रेस्क्यू टीमें

Sat, 25 Apr 2026 09:37 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Jaipur: राजस्थान के आठ जिलों में बीती रात ब्लैकआउट एक्सरसाइज और एयर स्ट्राइक मॉक ड्रिल का आयोजन कर आपातकालीन तैयारियों का परीक्षण किया गया। अलग-अलग समय पर 10 से 15 मिनट तक बिजली बंद रखी गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और रेस्क्यू ऑपरेशन की क्षमता को परखा गया, ताकि किसी भी आपदा या हमले की स्थिति में प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
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मॉक ड्रिल के दौरान की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के सीमावर्ती जैसलमेर और बाड़मेर समेत आठ जिलों में शुक्रवार देर शाम और रात ब्लैकआउट एक्सरसाइज आयोजित की गई। धौलपुर, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, दौसा, जालोर और झुंझुनूं में अलग-अलग समय पर 10 से 15 मिनट तक बिजली बंद रखकर आपातकालीन तैयारियों का परीक्षण किया गया। इस दौरान लोगों ने घरों और दुकानों की लाइटें बंद रखीं, जबकि कई जगह पूरी तरह अंधेरा छा गया। ब्लैकआउट के साथ एयर स्ट्राइक की मॉक ड्रिल भी की गई, जिसमें इमरजेंसी स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था और रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारियों को परखा गया।

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मॉक ड्रिल - फोटो : अमर उजाला


जैसलमेर में सायरन के साथ छाया अंधेरा
जैसलमेर शहर में आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच के तहत शुक्रवार रात ब्लैकआउट मॉक ड्रिल का व्यापक पूर्वाभ्यास किया गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रात करीब 8:30 बजे सायरन की आवाज पूरे शहर में गूंज उठी, जिसके साथ ही सोनार दुर्ग से लेकर विभिन्न कॉलोनियों तक अचानक अंधेरा छा गया। बिजली आपूर्ति बंद होते ही पूरा शहर कुछ देर के लिए पूर्ण ब्लैकआउट की स्थिति में नजर आया। करीब 15 मिनट तक चले इस ब्लैकआउट के दौरान आमजन ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए घरों और प्रतिष्ठानों की लाइट बंद रखी। हालांकि सड़कों पर आवश्यक गतिविधियां जारी रहीं, जहां वाहन चालक हेडलाइट जलाकर सावधानीपूर्वक आवाजाही करते दिखे। यह दृश्य किसी वास्तविक आपात स्थिति जैसा प्रतीत हो रहा था, जिससे लोगों में सतर्कता का माहौल बना रहा।

सायरन बजते ही सामान्य हुई जिंदगी
ब्लैकआउट समाप्त होने के बाद दोबारा सायरन बजाया गया, जो सामान्य स्थिति बहाल होने का संकेत था। इसके साथ ही शहर की बिजली आपूर्ति धीरे-धीरे पुनः शुरू कर दी गई और जनजीवन सामान्य होने लगा। इस पूरे अभ्यास का उद्देश्य हवाई हमले या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में शहर की सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और आम नागरिकों की तत्परता को परखना था। मॉक ड्रिल के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि संकट की घड़ी में ब्लैकआउट, संचार व्यवस्था और नागरिक सहयोग के जरिए नुकसान को कम किया जा सकता है। प्रशासन ने आमजन के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के पूर्वाभ्यास भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने में मददगार साबित होंगे।

मॉक ड्रिल - फोटो : अमर उजाला

15 मिनट तक अंधेरे में डूबा बाड़मेर 
वहीं, बाड़मेर जिला मुख्यालय पर शुक्रवार को गृह विभाग के निर्देशानुसार हवाई हमले के दौरान आपातकालीन तैयारियों को परखने के लिए मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट का आयोजन किया गया। इसमें प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा एवं अन्य संबंधित विभागों ने समन्वय के साथ आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास किया। शहर के पीजी राजकीय महाविद्यालय ने मॉक ड्रिल के तहत विभिन्न परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। हवाई हमले से अचानक उत्पन्न होने वाली आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने, घायलों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने तथा आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। इसके बाद बाड़मेर शहर में रात 8 बजे से 8:15 बजे तक ब्लैकआउट किया गया, जिसके चलते पूरा शहर करीब 15 मिनट तक अंधेरे में डूबा नजर आया।
 

मॉक ड्रिल की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला


'गृह विभाग के आदेश पर हुआ मॉक ड्रिल'
अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत ने बताया कि मॉक ड्रिल एवं ब्लैकआउट का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक सतर्कता और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। उन्होंने कहा कि गृह विभाग के निर्देशानुसार यह अभ्यास केवल प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि आमजन को आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से आपातकालीन सेवाओं के साथ-साथ आम नागरिकों की तत्परता और समन्वय की भी परख की गई। यह अभ्यास आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के कुशल प्रबंधन और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। उन्होंने विशेष रूप से एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड, विद्यालय एवं महाविद्यालय के विद्यार्थियों से इस अभ्यास में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया, ताकि वे आपदा के समय समाज के सशक्त सहयोगी बन सकें।

मॉक ड्रिल - फोटो : अमर उजाला
सायरन बजते ही अलर्ट हुआ प्रशासन, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू
दौसा में आपातकालीन हालात से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए शुक्रवार शाम पीजी कॉलेज परिसर में एयर स्ट्राइक और ड्रोन हमले पर मॉक ड्रिल की गई। कॉलेज भवन पर 5 मिसाइल और ड्रोन हमलों की सिमुलेशन के बाद सायरन बजाया गया और ब्लैकआउट कर दिया गया। शाम 7:30 बजे हमले का संकेत मिलते ही प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। जिला प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा, अग्निशमन, एम्बुलेंस, सिविल डिफेंस और नगर परिषद की टीमें मौके पर पहुंचीं। परिसर खाली कराया गया और सभी लाइटें बंद कराई गईं। सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमों ने 15 घायलों और 6 गंभीर घायलों को स्ट्रेचर के जरिए बाहर निकाला।

फायर ब्रिगेड और मेडिकल सिस्टम की जांच, ब्लैकआउट से परखी तैयारी
भवन में आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड ने पानी की बौछार कर हालात पर काबू पाया, जबकि दो घायलों को सीढ़ी के सहारे नीचे उतारकर अस्पताल भेजा गया। इस मॉक ड्रिल के दौरान चेतावनी प्रणाली, हॉटलाइन, चिकित्सा सेवाएं, फायर ब्रिगेड और कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली की भी जांच की गई। जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा ने रेस्पॉन्स टाइम और विभागों के समन्वय को संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ऐसी मॉक ड्रिल की अहमियत बढ़ गई है, जिससे किसी भी आपदा या हमले के समय त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। ड्रिल के बाद रात 7:30 से 7:45 बजे तक कॉलेज परिसर में ब्लैकआउट रखा गया।
 
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बालोतरा में राहत-बचाव कार्य करतीं टीमें - फोटो : अमर उजाला
बालोतरा में गैस टर्मिनल से लेकर ‘भूकंप’ तक, हर हालात का हुआ लाइव अभ्यास
बालोतरा जिले के गुड़ामालानी क्षेत्र में संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए एक व्यापक और बहु-स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य सिर्फ औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में विभिन्न विभागों के बीच तालमेल, त्वरित प्रतिक्रिया और संसाधनों की क्षमता का परीक्षण करना था। ड्रिल में प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस और अन्य संबंधित एजेंसियों ने मिलकर भाग लिया।

मॉक ड्रिल की शुरुआत रागेश्वरी गैस टर्मिनल के जीरो प्वाइंट से की गई, जहां एक गैस से भरे स्थायी टैंकर में आग लगने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। यह परिदृश्य इसलिए चुना गया क्योंकि औद्योगिक क्षेत्रों में गैस रिसाव या आग लगना गंभीर खतरा बन सकता है। जैसे ही ‘आपदा’ की सूचना दी गई, आपदा प्रबंधन टीम तुरंत सक्रिय हो गई। सबसे पहले गैस सप्लाई को बंद करने की प्रक्रिया अपनाई गई, ताकि आग के फैलाव को रोका जा सके। इसके बाद फायर टीम ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए आग पर काबू पाने का अभ्यास किया। इसी स्थान पर एक दूसरी आग की स्थिति भी बनाई गई, जिससे यह परखा जा सके कि एक साथ कई घटनाओं पर टीम कैसे प्रतिक्रिया देती है। दूसरी टीम ने स्वतंत्र रूप से आग बुझाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया, जबकि इंसीडेंट रिस्पांस टीम ने पूरे घटनाक्रम का संचालन और समन्वय संभाला। इस दौरान मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कार्यप्रणाली का बारीकी से अवलोकन किया और भविष्य में सुधार के लिए सुझाव भी साझा किए।

ड्रिल को और अधिक वास्तविक बनाने के लिए एक व्यक्ति के घायल होने की स्थिति भी बनाई गई। सूचना मिलते ही एम्बुलेंस को मौके पर बुलाया गया और घायल को प्राथमिक उपचार देते हुए तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, गुड़ामालानी पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ ने प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को रेफर करने की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की तत्परता और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन किया गया।

इसके अलावा तहसील कार्यालय परिसर में भूकंप के कारण भवन गिरने की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। इस परिदृश्य में सिविल डिफेंस टीम ने राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। मलबे में दबे ‘घायलों’ को सुरक्षित बाहर निकालने, पुलिस को सूचना देने और मेडिकल टीम द्वारा मौके पर ही प्राथमिक उपचार देने जैसी प्रक्रियाओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। पूरे मॉक ड्रिल के दौरान एसडीएम गुड़ामालानी स्वयं मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया। उन्होंने सभी टीमों के प्रदर्शन का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तरह के अभ्यास समय-समय पर आयोजित किए जाएं, ताकि आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया और भी तेज और प्रभावी हो सके।

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