भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर।
- फोटो : अमर उजाला
जयपुर भाजपा प्रदेश कार्यालय में सोमवार को प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और प्रदेश उपाध्यक्ष श्रवण सिंह बगड़ी ने प्रभु श्रीराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश कार्यालय में प्रभु श्रीराम के जीवन चित्रण पर आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। प्रदर्शनी में विभिन्न प्रकार की कलाकृतियां, कठपुतली नृत्य और पेंटिग सजाई गई थी। कार्यालय में रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह का लाइव प्रसारण भी किया गया, जहां सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने समारोह का लाइव टेलीकास्ट देखा।
मीडिया से बात करते हुए भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने कहा- रामलला प्राण प्रतिष्ठा एक अदभुत क्षण है, यह क्षण देखने को आंखे तरस गई थी। पिछले पांच सौ वर्षों से अयोध्याजी और भारत ने संघर्ष देखा है। हमने प्रभु श्रीराम का वियोग देखा है और बिछोह भी देखा। अयोध्याजी और संपूर्ण भारत उसका साक्षी रहा है। हमारे पूजनीय शंकराचार्य ने जो व्यवस्था हमें दी जिस स्वप्न और संकल्प को कहकर स्वामी विवेकानंद गए। उसी काम को पीएम नरेंद्र मोदी पूरा कर रहे हैं।
हम प्रभु श्री राम के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को देखकर आनंदित हैं, जिसका आनंद पूरा विश्व और पूरा देश ले रहा है। राम पुरुषों में उत्तम नरों में नरात्तम हैं, क्योंकि राम मर्यादा हैं, राम भारत का अध्यात्म है, राम भारत की संस्कृति हैं और राम भारत की न्याय व्यवस्था के प्रतीक हैं। राम राज्य एक आदर्श राज्य की संकल्पना है, जिसमें प्रजा सुखी रहती हैं और कोई छोटा बड़ा नहीं होता।
चंद्रशेखर ने कहा- प्रभु श्रीराम ने भारत को सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, नारी तू नारायणी, परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीड़नम जैसे विचार दिए हैं। उन्होंने बताया कि पौधे में भी भगवान का वास है। आज का प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपूर्ण देश में प्रसन्नता का वातावरण बनाएगा। विश्व आज भारत की त्यागमयी गौरवमयी जो संस्कृति है उसका दिव्य दर्शन कर रहा है।
हम संपूर्ण देशवासियों का अभिनंदन करते हुए विश्व में सुख शांति और प्रेम स्नेह की कामना करते हैं। जिस प्रेम और स्नेह को प्रभु श्रीराम ने भ्रातृत्व और सेवक भाव से निभाया। हम पीएम मोदी और न्यायपालिका का भी अभिनंदन करते हैं। न्यायपालिका ने राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त किया और आज पीएम मोदी ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। इक्कीसवी सदी भारत की सदी होगी, हम संसार में महाशक्ति बनकर वसुधैव कुटुबंकम के भाव से साथ मिलकर काम करेंगे।