राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने की मांग को लेकर बीकानेर आज पूरी तरह ‘खेजड़ी बचाओ, पर्यावरण बचाओ’ महापड़ाव के रंग में नजर आया। व्यापारिक संगठनों के समर्थन से शहर के प्रमुख बाजार सुबह से बंद रहे। वहीं शहरी क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों में लंच टाइम के बाद आधे दिन की छुट्टी घोषित की गई। पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न जिलों से हजारों पर्यावरण प्रेमी, बिश्नोई समाज के लोग, संत-साधु और आम नागरिक बीकानेर पहुंचे।
सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर कटाई के आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि पश्चिमी राजस्थान, विशेषकर बीकानेर और आसपास के इलाकों में सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ों की कटाई की जा रही है। कई स्थानों पर रात के अंधेरे में पेड़ काटकर उन्हें जमीन में दबा दिए जाने की भी शिकायतें सामने आई हैं, ताकि सबूत न मिल सके। पिछले एक महीने से कलेक्ट्रेट परिसर और करणीसर भाटियान में ‘खेजड़ी बचाओ आंदोलन’ के तहत अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है, जिसमें कई महिलाओं की तबीयत बिगड़ने की जानकारी भी सामने आई है।
महापंचायत के बाद तेज हुआ आंदोलन
इससे पहले बिश्नोई समाज के पवित्र स्थल मुकाम में हुई महापंचायत में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई थी। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि खेजड़ी की कटाई पर सख्त कानून बनाया जाए। वर्तमान में केवल एक हजार रुपये के जुर्माने को नाकाफी बताते हुए इसे गैर-जमानती अपराध घोषित करने की मांग की जा रही है।
सोमवार सुबह से पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में पर्यावरण प्रेमियों का जुटान शुरू हुआ। दोपहर बाद कलेक्ट्रेट परिसर के सामने जोरदार प्रदर्शन और धरना दिया गया। इसके साथ ही बिश्नोई धर्मशाला के पास विशाल सभा का आयोजन हुआ, जहां भजन संध्या, ‘खेजड़ी की बेटी’ विषय पर नाटक और रात्रि जागरण का कार्यक्रम रखा गया।
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प्रशासन और पुलिस की तैयारी
आंदोलन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। यातायात के लिए वैकल्पिक रूट तय किए गए हैं और कई स्थानों पर स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिलने से यह आंदोलन अब राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
पर्यावरण और आस्था से जुड़ा सवाल
आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थल की जीवनरेखा है। यह पर्यावरण, संस्कृति और आस्था का प्रतीक है। उनका मानना है कि यदि खेजड़ी का संरक्षण नहीं हुआ, तो रेगिस्तान की हरियाली और जीवन का संतुलन गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।