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Bikaner Kedli Accident: मासूमों की मौत पर सियासत गरमाई, सांसद हनुमान बेनीवाल बोले- सरकार दोषियों को बचा रही

Fri, 21 Feb 2025 09:57 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

परिजनों और ग्रामीणों ने नोखा से बीकानेर कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल समेत कई कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
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प्रदर्शन में मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीकानेर जिले के केड़ली गांव में सरकारी स्कूल की तीन छात्राओं की संदिग्ध परिस्थितियों में कुंड में डूबने से मौत के बाद मामला तूल पकड़ रहा है। तीन दिन बीत जाने के बावजूद शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं होने से परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने नोखा से बीकानेर कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च किया और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

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कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी  के सुप्रीमो व सांसद हनुमान बेनीवाल समेत कई कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर लापरवाही और मामले को दबाने के आरोप लगाए। हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर मृतक छात्राओं को न्याय नहीं मिला, तो यह लड़ाई आर-पार की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीकानेर जिले के एक केन्द्रीय मंत्री और भाजपा विधायक होने के बावजूद इस गंभीर मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों पर दबाव बना रही है, ताकि मामले को दबाया जा सके। बेनीवाल ने कहा कि दोषी अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर गिरफ्तार किया जाए। प्रत्येक मृतक छात्रा के परिवार को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

जयपुर कूच की चेतावनी, आर-पार की लड़ाई का एलान
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो यह प्रदर्शन और बड़ा होगा। उन्होंने ऐलान किया की जब तक सरकार हमारी मांगें पूरी नहीं करती, हम यहां डटे रहेंगे। अगर न्याय नहीं मिला, तो हम जयपुर तक कूच करेंगे। इस घटना के बाद से गांव में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता से ग्रामीणों और परिजनों में भारी गुस्सा है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना होगा कि सरकार और प्रशासन इस पर क्या फैसला लेते हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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