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राजस्थान: बीकानेर में कौमी एकता की मिसाल, मुस्लिम कलाकार मोहसिन खान 19 वर्षों से बन रहे श्रीराम

Sun, 18 Oct 2026 09:40 AM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

बीकानेर में मुस्लिम कलाकार मोहसिन खान पिछले 19 वर्षों से रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। वह नेताजी सुभाष कला मंडल की रामलीला का निर्देशन भी करते हैं। इस आयोजन में विभिन्न धर्मों के 80 से अधिक कलाकार और सहयोगी बिना पारिश्रमिक के भाग लेते हैं।
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मुस्लिम कलाकार मोहसिन खान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुस्लिम कलाकार मोहसिन खान पिछले 19 वर्षों से रामलीला के मंच पर भगवान श्रीराम का किरदार निभाकर आपसी सौहार्द और कौमी एकता की मिसाल पेश कर रहे हैं। वह नेताजी सुभाष कला मंडल की रामलीला में अभिनय करने के साथ ही इसका निर्देशन भी कर रहे हैं। नवरात्र के अवसर पर आयोजित इस मंचन के जरिये वह भगवान राम के आदर्शों, मर्यादा, करुणा और त्याग के संदेश को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
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कौमी एकता और निस्वार्थ सेवा
नेताजी सुभाष कला मंडल की यह रामलीला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की तस्वीर प्रस्तुत करती है। इस आयोजन में हिंदू और मुस्लिम सहित विभिन्न धर्मों के 80 से अधिक छोटे-बड़े कलाकार और सहयोगी निस्वार्थ भाव से जुड़े हुए हैं। इस मंचन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सभी कलाकार बिना किसी पारिश्रमिक के अपना योगदान दे रहे हैं। इन सभी का उद्देश्य भगवान राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और बीकानेर की साझी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना है।

कला और इंसानियत का संदेश
रामलीला के निर्देशक और कलाकार मोहसिन खान का मानना है कि कला को धर्म और मजहब के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार कला का असली उद्देश्य लोगों को आपस में जोड़ना और समाज में इंसानियत का संदेश फैलाना है। वह इंसानियत को ही सबसे बड़ा धर्म मानते हैं। पिछले 19 वर्षों से इस आयोजन से जुड़े रहने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हुई। उनके लिए मंच पर भगवान राम के आदर्शों को प्रस्तुत करना सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का सशक्त माध्यम है।
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परंपरा संरक्षण की चुनौतियां
आज की युवा पीढ़ी डिजिटल दुनिया और मोबाइल में अधिक व्यस्त होती जा रही है। इसके चलते पारंपरिक आयोजनों में दर्शकों की भागीदारी बनाए रखना और रामलीला के मंचन के लिए आर्थिक संसाधन जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके बावजूद, सभी कलाकार अपनी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में निरंतर लगे हुए हैं। उनका प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियां भी भारतीय संस्कृति, धार्मिक कथाओं और सामाजिक एकता के महत्व को समझें। बीकानेर की यह रामलीला दर्शाती है कि जब उद्देश्य इन्सानियत और प्रेम का संदेश देना हो, तो धर्म की दीवारें अपने आप छोटी पड़ जाती हैं।
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