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Rajasthan News: भीलवाड़ा में अपराधियों का महिमामंडन करने वाले सात गायक बैन, भविष्य में गाने पर भी रोक

Wed, 01 Oct 2025 10:17 PM IST
भीलवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भीलवाड़ा

सार

Bhilwara News: भीलवाड़ा पुलिस ने अपराधियों और माफियाओं का महिमामंडन करने वाले सात स्थानीय गायकों पर रोक लगा दी है। गानों को सोशल मीडिया से हटाने और भविष्य में ऐसे गीत न गाने की चेतावनी दी गई है।
 
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भीलवाड़ा में सात गायकों पर लगा बैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भीलवाड़ा पुलिस ने समाज में अपराध और हिंसा को बढ़ावा देने वाले गानों पर सख्त कदम उठाया है। एसपी धर्मेंद्र यादव के निर्देश पर गैंगस्टरों, बजरी माफियाओं और अपराधियों की शान बढ़ाने वाले सात स्थानीय गायकों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई। पुलिस का कहना है कि यह कदम समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक था।

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सात गायकों पर कार्रवाई
पुलिस ने जिन सात गायकों को चिन्हित किया है उनमें राजू रावल, सोनू गुर्जर, संधु गुर्जर, मुकेश गुर्जर, राजूलाल गाडरी, लादूलाल गुर्जर और मदन गुर्जर शामिल हैं। ये कलाकार हरियाणवी गानों की तर्ज पर अपराधियों और माफियाओं के गीतों को राजस्थानी लिरिक्स में गाते थे। गानों में पुलिस को नीचा दिखाने और अपराधियों को नायक के रूप में प्रस्तुत करने वाले बोल शामिल थे।
 
भड़काऊ बोल और खतरनाक असर
एसपी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि गानों में ‘गाड़ी में म्हारे संत महात्मा नहीं, चंबल के डाकू बैठे हैं’ और ‘गली में थारे धुवों-धुवों कर दूला’ जैसे बोल शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस तरह के गाने युवा पीढ़ी के लिए खतरनाक हैं क्योंकि वे अपराध की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
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सोशल मीडिया से गाने हटाने का आदेश
पुलिस ने इन गायकों को सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म से ऐसे गाने तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में कोई भी कलाकार ऐसे गीत गाते या लिखते पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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‘अब नहीं गाएंगे ऐसे गाने’
पुलिस के अनुसार, इन गायकों ने माफी मांगी है और भरोसा दिया है कि अब वे न तो अपराधियों के महिमामंडन वाले गाने लिखेंगे और न ही गाएंगे। इसके साथ ही उन्हें किसी भी सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर अपराधियों की शान में गाना गाने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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भीलवाड़ा पुलिस का यह कदम अपराधियों और माफियाओं की छवि को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस कार्रवाई की सराहना हो रही है। पुलिस का कहना है कि यह कदम न केवल अपराधी संस्कृति को हतोत्साहित करेगा बल्कि युवाओं को सही दिशा देने में भी सहायक होगा।

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