भीलवाड़ा जिले के अगरपुरा गांव में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के सम्मान में नवनिर्मित मंदिर में उनकी मूर्ति का अनावरण समारोह रविवार को भव्य तरीके से संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर शहीद भगत सिंह के पौत्र यादविंदर सिंह संधू ने उनकी मूर्ति का अनावरण किया। समारोह की शुरुआत भारत माता की जय, वंदे मातरम् और शहीद भगत सिंह अमर रहें के नारों के साथ हुई। यादविंदर सिंह और उनकी टीम का ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा से स्वागत किया। यह आयोजन रोड बालाजी मंदिर के पास स्थित मंदिर में हुआ, जहां 32 इंच की ग्रेनाइट से निर्मित भगत सिंह की मूर्ति स्थापित की गई है।
नशा मुक्त युवा भारत आंदोलन के सूत्रधार नारायण भदाला ने बताया कि मंदिर को देशभक्ति का प्रतीक बनाने के लिए यहां अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र भी लगाए गए हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 400 युवाओं की एक विशेष टीम ने जिम्मेदारी संभाली। इन युवाओं को 11 टीमों में बांटा गया, जिनका नाम स्वतंत्रता सेनानियों जैसे चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, सुखदेव, राजगुरु, मंगल पांडे और वीर सावरकर के नाम पर रखा गया। इन टीमों ने अपनी भूमिकाएं बखूबी निभाईं।
मुख्य अतिथि यादविंदर सिंह ने अपने संबोधन में शहीद भगत सिंह के बलिदान और विचारधारा की सराहना की। उन्होंने कहा, भगत सिंह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। उनका साहस और बलिदान सदैव युवाओं को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने युवाओं से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की। इस मौके पर कलाकार केजी कदम ने खून से भगत सिंह की लाइव पेंटिंग बनाकर सभी का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, कुमार राकेश, अजय गोड़, नैना जाट और खुशी जाट ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिससे वातावरण प्रेरणादायक हो गया।
भगत सिंह की मूर्ति स्थापित करने का वादा किया
समारोह में यह घोषणा की गई कि भीलवाड़ा जिले में एक ही दिन में 16 भगत सिंह की मूर्तियां स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। यह हरियाणा के सिरसा में बने रिकॉर्ड को तोड़ने की दिशा में एक कदम होगा। नारायण भदाला के आह्वान पर 8 गांवों के प्रतिनिधियों ने अपने गांवों में भगत सिंह की मूर्ति स्थापित करने का वादा किया। नवग्रह आश्रम के संस्थापक हंसराज चौधरी ने पहली मूर्ति आश्रम में लगाने की घोषणा की। अन्य गांवों जैसे रूपाहेली, उदलियास, कोटड़ी, कांदा और कीरतपुरा में भी मूर्तियां लगाने की योजना है।
भामाशाहों का किया सम्मान
मंदिर निर्माण और आयोजन में सहयोग देने वाले भामाशाहों को सम्मानित किया गया। साथ ही, 18 गांवों में गोशालाएं और गो उपचार केंद्र चलाने वाले गोभक्तों को भी सम्मानित किया गया। इस आयोजन में हंसराज चौधरी, ओम प्रकाश जाट, नारायण जाट, सुरेश धाकड़, रवींद्र जुनेजा सहित सैकड़ों ग्रामीण और युवा कार्यकर्ता शामिल हुए। यह कार्यक्रम न केवल शहीद भगत सिंह के प्रति सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि युवाओं को उनके बलिदान और देशभक्ति के आदर्शों से प्रेरित करने का भी प्रयास रहा।