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Bharatpur News: बस-ट्रेलर की टक्कर में एक ही परिवार के चार की मौत

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यशोदा बनकर अल्फाज को छाती से लगाए बैठी नीलम
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भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर में आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे पर शुक्रवार दोपहर हलैना के पास अलीगढ़ डिपो की रोडवेज बस की ट्रेलर में टक्कर से मृत पांचों महिलाओं की शिनाख्त हो गई। इनमें से चार एक ही परिवार की हैं। मृतकों में सास-बहू और इनकी दो धेवतियां शामिल हैं। सास-बहू मथुरा की रहने वाली हैं जबकि धेवतियां गौतमबुद्धनगर जिले के जेवर की निवासी थीं। ये ममेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए नानी के घर आईं थीं। इसी परिवार के दो मासूम भरतपुर के जिला अस्पताल में उपचाराधीन हैं। ये सभी जयपुर जा रहे थे।
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गोविंद नगर थाना क्षेत्र के सरस्वती कुंड क्षेत्र में गोपालपुरा निवासी मकबूल अली की मां 65 वर्षीय महिला नूरजहां अपनी बहू यासमीन (22) पत्नी मकबूल अली, जेवर निवासी धेवती खुशबू (18) और रेशम (20) पुत्रियां अमानुल्लाह, करीब चार वर्षीय नातिन फिजा और एक वर्ष के नाती अल्फेज के साथ जयपुर निवासी बेटी शर्मीली के यहां जा रहीं थीं। बस हलैना से करीब एक किमी दूर कृषि उपज मंडी के सामने आगे चल रहे लकड़ियों से लदे ट्रेलर से टकरा गई। हादसे में बस में सवार चार महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इनमें से एक की नफीसा पत्नी सलीम खान निवासी राधेश्याम नगर, मथुरा के रूप में पहचान हुई। जबकि चार अन्य की देर रात पहचान हो पाई।




सोशल मीडिया पर समाचार देखा तो पहुंचे हलैना

नूरजहां के छोटे बेटे मंसूर अली ने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर उस बस के हादसाग्रस्त होने की जानकारी मिली, जिसमें उनकी मां और परिवार के अन्य लोग सवार हुए थे, इसके बाद वह रात करीब एक बजे हलैना पहुंचे और मोर्चरी में रखे शवों की शिनाख्त की। इनमें उनकी मां नूरजहां, भाई मकबूल की पत्नी यासमीन, भांजियां खुशबू और रेशम थीं। मकबूल के बेटे अल्फेज और बेटी को भी चोटें आईं थी, जिनका उपचार चल रहा था।
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ओवरटेक के चक्कर में बस ट्रेलर से टकराई

अलीगढ़ डिपो की रोडवेज बस ओवरटेक के दौरान लक़डी से भरे ट्रेलर से टकरा गई थी। हादसे में बस में सवार पांच महिलाओं की मौत हो गई तथा परिचालक समेत 13 यात्री घायल हो गए। हलैना थाना प्रभारी बिजेन्द्र शर्मा ने बताया कि अलीगढ़ से वाया भरतपुर अजमेर जा रही बस हलैना से करीब एक किमी दूर कृषि उपज मंडी के सामने ट्रेलर से टकरा गई। घायल परिचालक जीतेन्द्र जाटव ने बताया कि बस में चालक-परिचालक सहित 45 यात्री सवार थे, इनमें से मथुरा व भरतपुर से सर्वाधिक यात्री सवार हुए थे। तीन यात्री हलैना उतर गए। शेष 42 लोग बस में सवार थे, जो आगे का सफर तय कर रहे थे। हादसे में रामू, संतोष, सूर्यप्रताप, राजू, मोहित, पप्पू, परिचालक जीतेन्द्र जाटव, अवनीश, तेजवीर, आसिव, फिरोज खान सहित 13 यात्री घायल हो गए।

घर में कोहराम, मोहल्ले में दौड़ी शोक की लहर
मथुरा। भरतपुर में सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के बाद सरस्वती कुंड क्षेत्र के गोपालपुरा में शनिवार को मृतकों के घर में कोहराम मचा था, वहीं पूरे मोहल्ले में शोक की लहर थी। मकबूल अली की मां नूरजहां, पत्नी यासमीन और भांजियां रेशम और खुशबू की मौत से हर कोई गमजदा था। मकबूल के एक साल की बेटी फिजा और करीब चार साल के अल्फेज को तो पता ही नहीं है कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं है। उन्हें को लाड़ लड़ाएगा, दादी भी इस दुनिया को छोड़कर जा चुकी है। शाम को चारों शवों को गमगीन माहौल में सुपुर्द ए खाक कर दिया।

दोपहर बाद जब चारों के शव घर आए तो परिजनों के विलाप से मकबूल के घर वाली गली में ही नहीं मोहल्ले में शोक का माहौल हो गया। बड़ी संख्या में लोग सांत्वना देने पहुंचे, लेकिन परिजनों का हाल देख वे खुद भावुक हो गए। हादसे में जान गंवाने वाली मकबूल की भांजियां जेवर निवासी खुशबू और रेशमा का सरकारी टीचर बनने का सपना अधूरा रहा गया। मकबूल के पिता मसूद अली बदहवास हालत में थे। उनकी पत्नी और बहू के अलावा दो धेवतियां इस दुनिया को छोड़कर जा चुकी थी।

सांत्वना देने के लिए आने वाले हर चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी। जवान बेटियों की मौत से जेवर के मोहल्ला खातीवान निवासी अमानुल्लाह सदमे में थे। उनकी पत्नी शकीला की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। दोनों बेटियां खुशबू और रेशम टीचर बनकर माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती थी। खुशबू बीएससी कर रही थी। रेशमा ने इसी साल इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की थी। जवान बेटियों की असमय मौत से बुजुर्ग माता-पिता का सपना चकनाचूर हो गया है।

ममेरे भाई की शादी में शामिल होने नानी के घर आई थीं बहनें
खुशबू और रेशम के पिता अमानुल्लाह ने बताया कि उनकी बेटियां ममेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए नानी नूरजहां के घर आईं थीं। 30 अप्रैल को उनका बेटा सुहेब दोनों बहनों को नानी के घर छोड़कर गया था। पत्नी शकीला भी शादी में शामिल होने के लिए पहले से अपनी मां के घर पर थीं। शादी के बाद खुशबू की नानी जयपुर में रहने वाली बेटी शर्मिली के यहां जाना था। वहां से उन्हें अजमेर शरीफ दर्शन करने जाना था। शुक्रवार सुबह 10 बजे सभी एक साथ हंसते मुस्कुराते घर से निकले थे। जयपुर जाने के लिए सभी आईएसबीटी मथुरा से अलीगढ़ डिपो की बस में सवार हुए थे। रास्ते में बस ट्रेलर से टकरा गई।

एक साथ उठे चार जनाजे, जिसने देखा भावुक हो उठा
गोपालपुरा में मकबूल अली के घर से दोपहर बाद एक साथ चार जनाजे उठे, जिसने भी यह दृश्य देखा भावुक हो गया। मृतकों के परिजन व रिश्तेदारों का रो-रो कर बुरा हाल था। पड़ोसी मुस्लिम व हिन्दू समुदाय के परिवारों में भी शोक का माहौल था। उनके लोग लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए। कब्रिस्तान में एक ही स्थान पर पास-पास में क्रब खोदी गई और शवों को सुपुर्द ए खाक किया।



शवों को देख रो पडे़ परिजन



मथुरा निवासी मंसूर अली और परिजन देर रात भरतपुर पहुंचे। शनिवार सुबह करीब 5 बजे हलैना आए। पुलिस शवों की शिनाख्त के लिए उन्हें मोर्चरी ले गई। शव देखते ही मंसूर और उनके परिजन रुलाई फूट गई। वे फफक-फफक रोने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें ढांढस बंधाया।


धेवतियां नहीं करती जिद तो बच जाती जान

मंसूर अली ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर निवासी भांजियां रेशम व जेवा उर्फ खूशबू अपनी नानी के साथ जाने की जिद न करती तो उनकी जान बच जाती। मां नूरजहां, भाभी यासमीन और उनके दो बच्चे बहन शर्मीली से मिलने जयपुर जा रहे थे। इस दौरान खुशबू और रेशम भी जयपुर जाने की जिद करने लगी। इस पर परिवार के लोग उन्हें मना नहीं कर सके।


यशोदा बन निभाया फर्ज
जाको राखे साइयां, मार सके न कोय। यह कहावत दर्दनाक हादसे के बाद चरितार्थ हो उठी। हादसे में घायल दो बच्चों में 1 साल का अल्फेज अली और साढे तीन साल की फिजा भी थे। दोनों का जिला आरबीएम अस्पताल में उपचार चल रहा है। अस्पताल में दोनों बच्चों को बिलखते देख हर किसी के आंखों से आंसू निकल पड़े। इनकी देखभाल के लिए अस्पताल प्रशासन ने अपना घर से संपर्क किया। दोनों की जिम्मेदारी अपना घर आश्रम की सेवा साथी नीलम ने संभाली। वह यशोदा बनकर अल्फाज को छाती से लगाए रखीं।
नीलम ने बताया कि शुक्रवार शाम पौने चार बजे वह अस्पताल पहुंची। उस समय दोनों बच्चों का इलाज चल रहा था। फिजा के जबड़े में चोट आई है। ठोड़ी में टांके लगे हैं। ड्रिप लगी हुई थी। मासूम अल्फाज अली रोए जा रहा था। अल्फाज को गोदी में लिया और दूध पिलाया। उसके पैर में चोट लगी थी। नीलम ने बताया कि रातभर अल्फाज रोता रहा। मुश्किल से कुछ देर के लिए ही सो पाया। इसलिए रातभर उसे गोद में लेकर सुलाने का प्रयास किया। दूध व दलिया भी खिलाया। अपना घर आश्रम की अध्यक्ष बबीता गुलाटी ने बताया कि आश्रम से बच्चों की देखभाल के लिए नीलम को भेजा गया था।
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