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Bharatpur News: पीलूपुरा में 8 जून को गुर्जर महापंचायत, प्रशासनिक अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण

Fri, 06 Jun 2025 03:27 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर

सार

गुर्जर समाज की विभिन्न मांगों को लेकर बयाना के पीलूपुरा में 8 जून को महापंचायत का आयोजन किया गया है। इस संबंध में समाज के लोग घर-घर जाकर लोगों को महापंचायत में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं।
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राजस्थान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिले के बयाना उपखंड स्थित पीलूपुरा गांव में 8 जून को गुर्जर समाज की महापंचायत आयोजित की जाने वाली है। इस महापंचायत में समाज की विभिन्न मांगों को लेकर भविष्य की आंदोलनात्मक रणनीति तय की जाएगी। पीलूपुरा वही ऐतिहासिक स्थल है, जहां से गुर्जर आंदोलनों की शुरुआत होती रही है।

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गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैसला ने पीलूपुरा शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि सभा के दौरान महापंचायत की घोषणा की थी। इसके बाद से समाज के लोग गांव-गांव जाकर पीले चावल बांट रहे हैं और लोगों को महापंचायत में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं।

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रेलवे ट्रैक और स्टेट हाईवे से 100 मीटर की दूरी पर महापंचायत स्थल निर्धारित किया गया है, जहां बड़ी संख्या में समाज के लोग जुटेंगे। भरतपुर के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने संभावित स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन वार्ता के लिए तैयार है और सामाजिक प्रतिनिधियों से लगातार संवाद किया जा रहा है।

इधर संभागीय आयुक्त डॉ. अमित यादव की अध्यक्षता में गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की गई। बैठक में समाज की प्रमुख मांगों को सामने रखा गया, जिनमें पूर्व भर्तियों में बैकलॉग पदों को भरना, स्कूटी योजना का लाभ न मिलना, और देवनारायण बोर्ड की गतिविधियों में समाज की भागीदारी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

डॉ. अमित यादव ने आश्वस्त किया कि समाज की हर उचित मांग को सरकार के समक्ष रखा जाएगा। इस अवसर पर आईजी राहुल प्रकाश ने प्रतिनिधियों को देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति से अवगत कराते हुए बताया कि वर्तमान में  ऑपरेशन सिंदूर सहित कई मॉक ड्रिल चल रही हैं, ऐसे में कोई भी भड़काऊ संदेश देश की सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
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हालांकि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति का कहना है कि इस बैठक से उनका कोई संबंध नहीं है। समिति का कहना है कि समाज की मांगों पर सरकार अब तक गंभीर नहीं रही है, जिस कारण फिर से आंदोलन की राह अपनानी पड़ रही है।

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