भरतपुर में बघेल महासभा की ओर से सूरजपोल बगीची पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का अनावरण समारोह केंद्रीय मंत्री एसपी बघेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्पाजंलि अर्पित कर नमन किया।
इस दौरान समारोह को संबोधित करते हुए बघेल ने कहा कि देवी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने जीवन काल में शासन को कुशल शासिका के रूप में चलाया। उन्होंने समाज की जागरुकता पर बल देते हुए कहा कि समाज के बच्चों को पढ़ा-लिखा कर योग्य बनाएं। शिक्षा का कोई विकल्प नहीं होता है। बच्चों को शिक्षित कर उन्हें उच्च पदों पर पहुंचाने में योगदान दें। उन्होंने समाज को शिक्षा के साथ-साथ राजनैतिक क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने का आव्हान किया।
उन्होंने अंग्रेजी भाषा को लेकर कहा कि देश से अंग्रेजों को भगाया था तो कायदे से अंग्रेजी को समुद्र में डूबो देना चाहिए था। लिवर को यकृत, आरबीसी को लाल रक्त कणिका कहते तो कोई मजाक नहीं होती। अंग्रेजी नहीं जानने पर भारत के ही लोग भारत के लोगों का मजाक उड़ाएंगे। अगर कोई भी बच्चा फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता है तो 50 हजार रुपये की नौकरी मिलेगी, यह अंग्रेजी का जलवा है। अगर किसी का बच्चा अंग्रेजी, कंप्यूटर और जीके नहीं जानता है तो उसे नौकरी नहीं मिलेगी। डिग्री को दीवार पर टांग देना फिर चपरासी भी बनने वाला नहीं है।
वहीं केंद्रीय मंत्री ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए एक बच्चे का उदाहरण देते हुए कहा, एक बच्चे ने कहा सर हम शहर आएंगे। 12 साल बाद फिर ट्यूशन लगाएंगे। लेकिन हमने मायावती और अखिलेश की सरकार में नकल से पास हुए हैं। हमारे लिए जॉब का कोई फॉर्मूला हो तो बताना। नकल विरोधी अधिनियम, 1992 भारतीय जनता पार्टी के कल्याण सिंह की अध्यक्षता वाली उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू किया गया एक भारतीय कानून था।
हालांकि, उस समय सिंह सरकार में शिक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को इस विचार का श्रेय दिया जाता है। लेकिन मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन में कहा कि हमारी सरकार आएगी तो शपथ लेने के बाद पहली कैबिनेट की मीटिंग में इस नकल विरोधी अधिनियम को समाप्त कर देंगे। लेकिन यही वजह है कि उस समय की आग में आज बच्चे झुलस रहे हैं। यही हाल अब राजस्थान का भी हो गया है। पहले भले ही 22 प्रतिशत परिणाम होता था। लेकिन उस समय कोई भी बेरोजगार नहीं था, लेकिन अब 88 प्रतिशत परिणाम के बाद भी लोग बेरोजगार हैं। अब समय के अनुसार बच्चों को पढ़ा-लिखा कर योग्य बनाए।