भैराना से जयपुर कूच की तैयारी, सरकार को एक घंटे का अल्टीमेटम
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भैराना धाम में प्रस्तावित रीको औद्योगिक क्षेत्र के विरोध में चल रहे आंदोलन ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए जयपुर कूच का ऐलान कर सरकार को एक घंटे का अल्टीमेटम दिया है। बेनीवाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार साधु-संतों की मांगों पर गंभीरता से फैसला नहीं लेती तो संत समाज और हजारों समर्थकों के साथ राजधानी की ओर कूच किया जाएगा।
भैराना धाम महापंचायत में बेनीवाल का ऐलान
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जयपुर जिले की मौजमाबाद तहसील के बिचून स्थित दादूपंथ के प्रमुख आस्था केंद्र भैराना धाम में प्रस्तावित रीको औद्योगिक क्षेत्र का साधु-संत और स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। भैराना बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन पिछले 39 दिनों से जारी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र बनने से धाम की धार्मिक पवित्रता, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा।
भैराना धाम महापंचायत में उपस्थित साधु-संत एवं जनसेवक
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आंदोलन के बीच 27 मई को विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान सहित कई राज्यों से संत-महात्मा, ग्रामीण और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए। संघर्ष समिति ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो जयपुर कूच किया जाएगा।
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बेनीवाल का सरकार पर सीधा हमला
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हनुमान बेनीवाल ने महापंचायत में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार संत समाज की भावनाओं के प्रति संवेदनशील नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के निजी हितों के लिए भैराना धाम जैसी तपोभूमि और पर्यावरण से खिलवाड़ किया जा रहा है। बेनीवाल ने कहा कि यदि साधु-संतों की बात नहीं सुनी गई तो आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में बदल जाएगा।
महापंचायत में जयपुर कूच का ऐलान
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बेनीवाल के जयपुर कूच के ऐलान के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जयपुर जिला कलेक्टर और रेंज आईजी राहुल प्रकाश भैराना धाम पहुंचे और कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया। आंदोलन स्थल और आसपास भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है।
प्रशासन लगातार संत समाज और संघर्ष समिति से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश में जुटा है, लेकिन अब तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में जयपुर कूच को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ धार्मिक स्थल बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का अभियान है।