पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक नहीं कराने के मुद्दे पर हाईकोर्ट के अवमानना नोटिस के बाद राज्य निर्वाचन आयोग सक्रिय हो गया है। आयोग अब चुनाव कार्यक्रम में हुई देरी को लेकर अपना पक्ष तैयार कर रहा है। जानकारी के अनुसार आयोग अपने जवाब में राज्य सरकार के साथ हुए पत्राचार और समय पर जरूरी सूचना नहीं मिलने को प्रमुख कारण बताकर कोर्ट के समक्ष इसे अपने पक्ष के रूप में रखने की तैयारी कर रहा है। आयोग को हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह के भीतर अपना जवाब पेश करने के लिए कहा है।
नगरीय निकायों के मामले में स्थिति और जटिल रही। आयोग ने 19 और 24 दिसंबर, 2025 को पत्र लिखकर परिसीमन और चुनाव की स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अंततः 20 फरवरी 2026 को 196 निकायों के लिए एकतरफा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी करना पड़ा।
आयोग ने राज्य सरकार को कब-कब लिखे पत्र
पंचायती राज चुनाव:
नगरीय निकाय चुनाव:
गहलोत ने बताया संवैधानिक संकट
इधर कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार को घेर रही है। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बुधवार को इस संबंध में बयान जारी किया। गहलोत ने कहा कि बीजेपी वन स्टेट, वन इलेक्शन जैसे बहानों के पीछे छिपकर चुनावों को टालने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की अलोकतांत्रिक सोच के कारण राजस्थान में संवैधानिक संकट गहराता जा रहा है। पंचायतों और नगरीय निकायों में एक वर्ष से अधिक समय से चुनाव नहीं कराए जाना और उनकी जगह सरकारी प्रशासकों की नियुक्ति, यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रहार है।