राजस्थान के बाड़मेर में दुष्कर्म कर नाबालिग को ऊंची पहाड़ी से धक्का देकर निर्मम हत्या करने वाले दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने कहा है कि दोनों ने बलात्कार के बाद ऊंची पहाड़ी से धक्का देकर अमानवीय, निर्दयता के साथ दयाहीन होकर हत्या की है। इस कारण मामले को रेयर ऑफ दी रेयरेस्ट मानते हुए फांसी की सजा देना ही न्यायोचित है। साथ ही, इसी मामले में दोषियों का सहयोग करने वाले तीन अन्य दोषियों को सात-सात वर्ष के लिए जेल भेज दिया है।
मामले के तहत बाड़मेर के निम्बड़ी गांव में 29 मार्च 2013 को 11 वर्ष की बच्ची को अगवा किया और दुष्कर्म के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से पहाड़ी से नीचे फेंककर मार डाला गया था। विशिष्ठ न्यायाधीश (पोक्सो कैसेज) वमीता सिंह ने मुख्य अभियुक्तों निम्बड़ी गांव निवासी घेवरसिंह राजपुरोहित व श्रवणसिंह राजपुरोहित को फांसी की सजा सुनाई है।
आदेश में कहा गया है कि दुष्कर्म कर नृशंस हत्या ने न्यायिक संवेदना को ही नहीं झकझोरा है, बल्कि सामाजिक अंत:करण को भी ठेस पहुंचाई है। दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376ए, 302 व 120बी के तहत सजा सुनाई गई। मामले में सह आरोपियों प्रहलाद सिंह, नरसिंग सिंह और शंकर सिंह को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।