दिलावर परिवार के दो प्रबल दावेदार
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अटरू नगर पालिका चुनाव में अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा में टिकट को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी चर्चा के केंद्र में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के परिवार के संभावित दावेदार भी हैं। एक ओर उनके अनुज और वर्तमान सरपंच कृष्ण मुरारी दिलावर की वार्ड नंबर 5 से दावेदारी सामने आई है, वहीं मंत्री पुत्र पवन दिलावर के भी चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा ने पार्टी के भीतर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार कृष्ण मुरारी दिलावर ने वार्ड नंबर 5 से भाजपा के टिकट के लिए दावेदारी पेश की है। उनके समर्थकों का कहना है कि वे लंबे समय से क्षेत्र की सामाजिक गतिविधियों और जनसरोकार के कार्यों से जुड़े रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी सक्रियता और संपर्क को उनकी दावेदारी की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है। उनके समर्थकों का दावा है कि विधानसभा क्षेत्र से लेकर वार्ड स्तर तक उनकी पकड़ मजबूत है। इसी वजह से उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष पद के संभावित दावेदारों में भी शामिल माना जा रहा है।
पवन दिलावर के नाम की चर्चा से उठे सवाल
दूसरी ओर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के पुत्र पवन दिलावर के भी अटरू नगर पालिका चुनाव में उतरने की चर्चा है। राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि भाजपा नगर पालिका में बहुमत हासिल करती है तो क्या अध्यक्ष पद के लिए दिलावर परिवार से ही किसी नाम को आगे किया जाएगा। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और टिकट वितरण के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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जमीनी कार्यकर्ताओं में हलचल तेज
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर चर्चा है कि नगर निकाय चुनावों में जमीनी संगठन की भूमिका सबसे अहम होती है। ऐसे में यदि किसी प्रभावशाली राजनीतिक परिवार को प्राथमिकता मिलती है तो वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं के अवसर सीमित होने की आशंका जताई जा रही है। पार्टी के भीतर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि टिकट वितरण में राजनीतिक प्रभाव के बजाय संगठनात्मक सक्रियता, जनस्वीकार्यता और वार्ड स्तर की पकड़ को कितना महत्व दिया जाएगा।
भाजपा के सामने संतुलन साधने की चुनौती
अटरू में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती संभावित दावेदारों के बीच संतुलन बनाने की है। एक तरफ कृष्ण मुरारी दिलावर की स्थानीय सक्रियता और कार्यकर्ताओं से संपर्क को उनकी ताकत माना जा रहा है। दूसरी ओर पवन दिलावर की संभावित दावेदारी ने संगठन के भीतर टिकट चयन को लेकर बहस तेज कर दी है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार अटरू नगर पालिका चुनाव में टिकट का फैसला सिर्फ एक वार्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर स्थानीय संगठन, कार्यकर्ताओं के मनोबल और आने वाले समय की राजनीतिक दिशा पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल भाजपा ने टिकट को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया है। संभावित उम्मीदवारों से दावेदारी और संगठनात्मक फीडबैक लेने का दौर जारी है। अब सबकी नजर पार्टी की सूची पर है, जिसके सामने आने के बाद साफ होगा कि अटरू में भाजपा किस चेहरे पर दांव लगाती है।