परतापुर-गढ़ी नगरपालिका में 11 सितंबर को दूसरे चरण में मतदान होगा। 25 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और बीएपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा दूसरी जीत, कांग्रेस पहली जीत के लिए मैदान में है। सड़क, पेयजल और यातायात प्रमुख मुद्दे हैं।
निकाय चुनाव की घोषणा के बाद बांसवाड़ा जिले की परतापुर-गढ़ी नगरपालिका में दूसरी बार चुनाव होने जा रहे हैं। यहां दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान होगा। इस बार नगरपालिका अध्यक्ष का पद अनारक्षित है। गढ़ी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। आठ वर्ष पहले गठित हुई इस नगरपालिका में भाजपा दूसरी जीत दर्ज करने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस पहली बार बोर्ड बनाने के लिए मैदान में है। वहीं भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
डाटा प्वाइंटर
आरक्षण की स्थिति
2019 में पहली बार हुआ था चुनाव
परतापुर-गढ़ी नगरपालिका में पहली बार 2019 में चुनाव हुए थे। उस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा था। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और दोनों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ी। बाद में भाजपा निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाने में सफल रही। इस बार बीएपी के मैदान में उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया है। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने बोर्ड बनाने के लिए अधिक सीटें जुटाने की चुनौती रहेगी।
आरक्षण से बदली दावेदारों की रणनीति
वार्डों के पुनर्गठन और जनसंख्या के आधार पर हुए आरक्षण के बाद कई वार्डों में दावेदारों की स्थिति बदल गई है। कुछ दावेदारों के वार्ड महिला या अन्य आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं। ऐसे में दावेदार अपने समाज के बहुमत वाले दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों की दावेदारी के चलते राजनीतिक दलों को टिकट वितरण से पहले दावेदारों के बीच समझाइश का प्रयास भी करना पड़ रहा है।
स्थानीय मुद्दे बन सकते हैं चुनावी आधार