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राजस्थान निकाय चुनाव: परतापुर-गढ़ी में भाजपा की दूसरी जीत या कांग्रेस का खुलेगा खाता? बना त्रिकोणीय मुकाबला

Fri, 28 Aug 2026 07:01 AM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा

सार

परतापुर-गढ़ी नगरपालिका में 11 सितंबर को दूसरे चरण में मतदान होगा। 25 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और बीएपी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा दूसरी जीत, कांग्रेस पहली जीत के लिए मैदान में है। सड़क, पेयजल और यातायात प्रमुख मुद्दे हैं।

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सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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निकाय चुनाव की घोषणा के बाद बांसवाड़ा जिले की परतापुर-गढ़ी नगरपालिका में दूसरी बार चुनाव होने जा रहे हैं। यहां दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान होगा। इस बार नगरपालिका अध्यक्ष का पद अनारक्षित है। गढ़ी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। आठ वर्ष पहले गठित हुई इस नगरपालिका में भाजपा दूसरी जीत दर्ज करने की कोशिश में है, जबकि कांग्रेस पहली बार बोर्ड बनाने के लिए मैदान में है। वहीं भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

डाटा प्वाइंटर

  • नगरीय निकाय: परतापुर-गढ़ी नगरपालिका
  • मतदान की तारीख: 11 सितंबर
  • कुल मतदाता: 19,214
  • पुरुष मतदाता: 9,572
  • महिला मतदाता: 9,641
  • युवा मतदाता: 7,076
  • वर्तमान बोर्ड: भाजपा
  • कुल वार्ड: 25
  • भाजपा पार्षद: 11
  • कांग्रेस पार्षद: 10
  • निर्दलीय पार्षद: 4

आरक्षण की स्थिति

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नगरपालिका के 25 वार्डों में एससी के लिए 2 वार्ड आरक्षित हैं, जिनमें 1 वार्ड महिला के लिए है। एसटी के 4 वार्डों में 1 महिला के लिए आरक्षित है। ओबीसी के 5 वार्डों में 2 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। सामान्य वर्ग के 14 वार्डों में 4 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कुल 8 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

2019 में पहली बार हुआ था चुनाव
परतापुर-गढ़ी नगरपालिका में पहली बार 2019 में चुनाव हुए थे। उस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा था। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और दोनों को निर्दलीय पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ी। बाद में भाजपा निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाने में सफल रही। इस बार बीएपी के मैदान में उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया है। त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने बोर्ड बनाने के लिए अधिक सीटें जुटाने की चुनौती रहेगी।

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पढे़ं: आम आदमी पार्टी ने जयपुर में 11 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, किसे मिला मौका?

आरक्षण से बदली दावेदारों की रणनीति
वार्डों के पुनर्गठन और जनसंख्या के आधार पर हुए आरक्षण के बाद कई वार्डों में दावेदारों की स्थिति बदल गई है। कुछ दावेदारों के वार्ड महिला या अन्य आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं। ऐसे में दावेदार अपने समाज के बहुमत वाले दूसरे वार्डों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों की दावेदारी के चलते राजनीतिक दलों को टिकट वितरण से पहले दावेदारों के बीच समझाइश का प्रयास भी करना पड़ रहा है।

स्थानीय मुद्दे बन सकते हैं चुनावी आधार

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परतापुर-गढ़ी में खस्ताहाल सड़कें, बेतरतीब यातायात, पेयजल की समस्या और नगर के बीच स्थित डंपिंग यार्ड जैसे मुद्दे चुनाव में प्रमुख रह सकते हैं। नगरपालिका में शामिल किए गए ग्रामीण इलाकों के लोग मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने को लेकर पहले भी विरोध जता चुके हैं। इन क्षेत्रों के लोगों ने अपने इलाकों को दोबारा ग्राम पंचायत में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन भी किया था। हालांकि सरकार के स्तर पर उनकी मांग पर अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में ये मुद्दे चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए अहम हो सकते हैं।

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