राजस्थान के 309 निकायों में चुनावी पारा चढ़ा हुआ है। राजनीतिक दल निकायों में अपना बोर्ड बनाने को लेकर पूरी ताकत लगा रहे हैं। निकाय चुनावों में कई ऐसे रोचक किस्से सामने आते हैं, जो सुर्खियों में बने रहे हैं। ऐसे किस्सों में बांसवाड़ा भी पीछे नहीं है। बांसवाड़ा निकाय में पिता-पुत्र, पिता-पुत्री, पति-पत्नी पार्षद बने हैं। इनमें से कुछ इस बार के चुनाव में भी चुनावी भाग्य आजमाएंगे।
पिता-पुत्री दो बार साथ-साथ जीते
1994 से 2019 तक हुए 6 चुनाव के इतिहास में 2 बार ऐसा अवसर आया, जब कांग्रेस से नाथूलाल हरिजन और उनकी पुत्री देवबाला दो बार साथ-साथ शहरी सदन में पहुंचे। 1994 के चुनाव में देवबाला वार्ड 6 से जीतकर पार्षद बनी तो उनके पिता नाथूलाल ने वार्ड 13 से जीत हासिल की। इसके 15 वर्ष उपरांत 2009 में दोनों ने फिर साथ-साथ जीत प्राप्त की। 2009 में देवबाला ने वार्ड 8 से और नाथूलाल ने वार्ड 9 से जीत हासिल की। देवबाला बीते सभी 6 चुनाव अलग-अलग वार्ड से जीत चुकी हैं और इस बार भी चुनाव मैदान में हैं।
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पति और पत्नी बने पार्षद
1982 के चुनाव में वार्ड 20 से कांग्रेस के शाहबास खां निर्वाचित हुए तो उनकी पत्नी सारिया खान बतौर सहवृत सदस्य मनोनीत की गई। 1994 के चुनाव में भाजपा से प्रीति दोसी पार्षद बनी तो 1999 में उनके पति निर्मल दोसी चुनाव जीते। 1994 में वार्ड 34 से भाजपा के आजाद खान पठान जीते तो 2014 में उनकी पत्नी नाजआरा खान पठान ने वार्ड 42 से जीत हासिल की। 1999 के चुनाव में कांग्रेस से वार्ड 23 से अनिता गुप्ता ने जीत दर्ज की तो अगले 2004 में हुए चुनाव में उनके पति अशोक गुप्ता ने भी इसी वार्ड से जीत दर्ज की। 1999 में ही वार्ड 7 से भाजपा के दिलीप यादव जीते तो 2014 में उनकी पत्नी दुर्गा यादव ने वार्ड 10 से जीत का परचम फहराया। 2004 में मीनाक्षी पटेल पार्षद बनीं। 2020 में उनके पति राजेश पटेल को पार्षद मनोनीत किया गया। 2014 में धनेश्वर यादव पार्षद बने, जबकि 2019 में उनकी पत्नी गीता यादव पार्षद चुनी गईं। कांग्रेस से दोस्त मोहम्मद पार्षद रहे और उनके निधन के बाद 2019 में उनकी पत्नी रशीदा भी पार्षद चुनी गईं।
पिता के नक्शेकदम पर पुत्र
1982 में पार्षद रहे मणिलाल बोहरा 1994 में अध्यक्ष बने, वहीं उनके पुत्र महावीर बोहरा ने 2014 और 2019 में जीते। 1999 में हाजी अमीर मोहम्मद मंसूरी वार्ड 32 से कांग्रेस से विजयी हुए तो 2004 में उनके पुत्र आबिद मंसूरी ने वार्ड 30 से भाजपा से जीत हासिल की। 1982 में पार्षद रहे एडवोकेट लक्ष्मीकांत त्रिवेदी के पुत्र जैनेन्द्र त्रिवेदी 2019 में कांग्रेस से वार्ड 39 से चुनाव लड़े और बांसवाड़ा में सामान्य वर्ग के पहले पुरूष सभापति बने। एडवोकेट जियाउल्ला खान के बाद 2014 में उनके पुत्र इमरान खान पार्षद बने।
जीजा ने साले को हराया
1994 में भाजपा ने वार्ड 18 से बालकिशन सोनी को टिकट दिया। उनके सामने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनके साले कमल सोनी चुनाव लड़े। बालकिशन सोनी विजयी रहे। इसी तरह 2009 के चुनाव में वार्ड 15 से भाजपा के कांतिलाल ने अपने परिवार के दामाद कांग्रेस के राजेश पटेल को मात दी थी। अब एक बार फिर लोगों की निगाहें चुनावी रण में सामने आने वाले रोचक प्रसंगों पर टिकी हैं।