विश्व गौरैया दिवस पर अनोखी मिसाल
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बांसवाड़ा जिले के अगरपुरा निवासी मनीष शर्मा ने गौरैया संरक्षण को लेकर एक प्रेरणादायक पहल की है। पिछले पांच वर्षों से वे टायर, प्लास्टिक की बोतलों और थर्माकोल जैसे अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग कर अपने घर में 80 से अधिक घोंसले तैयार कर चुके हैं। उनके इस प्रयास का परिणाम यह है कि आज उनके घर पर प्रतिदिन करीब 200 चिड़ियां दाना चुगने आती हैं और इन घोंसलों में अब तक 40 से अधिक अंडे भी दिए जा चुके हैं।
पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार
मनीष शर्मा ने केवल घोंसले ही नहीं बनाए, बल्कि चिड़ियों के अनुकूल वातावरण तैयार करने पर भी ध्यान दिया है। उन्होंने अपने घर पर 100 से अधिक झाड़ीदार पौधे लगाए हैं, जिससे पक्षियों को प्राकृतिक माहौल मिल सके। उनके इस प्रयास के चलते उनका घर अब पक्षियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक स्थान बन गया है।
लॉकडाउन में शुरू हुआ अनोखा प्रयास
मनीष बताते हैं कि लॉकडाउन के दौरान मिले समय का उपयोग उन्होंने पक्षियों के लिए दाना-पानी और घरौंदे तैयार करने में किया। धीरे-धीरे यह प्रयास एक बड़े रूप में सामने आया। घर के आंगन से लेकर छत तक हर जगह हरियाली और घोंसलों की व्यवस्था की गई, जिससे कई पक्षियों को स्थायी आसरा मिल सका।
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अपशिष्ट वस्तुओं का रचनात्मक उपयोग
उन्होंने बेकार पड़ी चीजों जैसे टायर, प्लास्टिक की खाली बोतलें, कैन, टूटी बाल्टियां और मटकों का उपयोग कर उन्हें गमलों और घोंसलों का रूप दिया। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि संसाधनों के सही उपयोग से प्रकृति को सहेजा जा सकता है।
पक्षियों के लिए बना ‘स्वर्ग’
पिछले दस वर्षों से प्रकृति प्रेमी के रूप में सक्रिय मनीष शर्मा ने अपने घर को पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल स्थान में बदल दिया है। उनके घर में दिनभर पक्षियों का कलरव गूंजता रहता है। वे मानते हैं कि पौधों और पक्षियों को केवल देखभाल ही नहीं, बल्कि प्रेम और संवेदनशीलता की भी आवश्यकता होती है।