बांसवाड़ा के माही बांध क्षेत्र को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। बांध के भराव क्षेत्र में स्थित ‘हंड्रेड आइलेंड्स’ और आसपास की भूमि पर सुनियोजित पर्यटन विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। यह पहल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में की जा रही है, जिससे क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
उच्चस्तरीय समिति का गठन
राज्य सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता उदयपुर संभागीय आयुक्त करेंगे। इसके साथ ही बांसवाड़ा जिला कलेक्टर, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, उप वन संरक्षक, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी, सहायक नगर नियोजक और पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक को सदस्य बनाया गया है। निर्माण वृत्त माही परियोजना के अधीक्षण अभियंता को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मास्टर प्लान में भूमि उपयोग और नियमों पर फोकस
यह समिति माही बांध के जल भराव क्षेत्र, आइलैंड्स और आसपास की सरकारी एवं निजी भूमि के उपयोग निर्धारण, डिमार्केशन, लीज और आवंटन से जुड़े पहलुओं पर कार्य करेगी। साथ ही वाटर स्पोर्ट्स और पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए नियम और दिशा-निर्देश भी तय किए जाएंगे। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और जल प्रदूषण रोकने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इको-टूरिज्म और वाटर एक्टिविटीज को बढ़ावा
माही बैक वाटर में फैले टापू, हरियाली और पहाड़ियों से घिरा यह क्षेत्र पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। ‘सिटी ऑफ हंड्रेड आइलेंड्स’ के रूप में प्रसिद्ध इस इलाके में वाटर एक्टिविटीज, नेचर-बेस्ड टूरिज्म और व्यू-पॉइंट विकसित किए जाने की योजना है। इससे यह क्षेत्र राजस्थान ही नहीं, देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हो सकता है।
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संतुलित विकास और रोजगार सृजन पर जोर
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने बताया कि माही बांध क्षेत्र का विकास पर्यावरण अनुकूल और संतुलित तरीके से किया जाएगा। इस योजना से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और जल संरक्षण के उद्देश्यों को भी मजबूती मिलेगी।
क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सरकार का यह प्रयास माही क्षेत्र को नई पहचान देने के साथ-साथ समग्र क्षेत्रीय विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा। मास्टर प्लान के माध्यम से पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।