फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़ने-खेलने की उम्र में वैराग: इकलौता बेटा परिवार छोड़ लेगा जैन दीक्षा, राजस्थान के जहान ने क्यों लिया फैसला?

Tue, 13 Oct 2026 09:07 AM IST
बालोतरा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोतरा

सार

आमतौर पर जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई, करियर और भविष्य के सपने संजोते हैं, उसी उम्र में राजस्थान के जहान बेताला के मन में संयम और त्याग के विचार विकसित होने लगे थे। अब वह अपने संकल्प को औपचारिक रूप देने जा रहे हैं। 18 जनवरी 2027 को लाडनूं में जहान जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे।
विज्ञापन
12 साल के जहान बेताला छोड़ेंगे सांसारिक जीवन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान के बोरावड़ मूल के जहान बेताला 18 जनवरी 2027 को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे। गुजरात के सूरत में रह रहे जहान लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आचार्य  महाश्रमणजी के सान्निध्य में दीक्षा लेंगे। परिवार के अनुसार, जहान के मन में करीब 12 वर्ष की उम्र से ही त्याग और संयम के प्रति रुचि विकसित होने लगी थी। साध्वी मंगलप्रज्ञा के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक जीवन की ओर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। जहान के माता-पिता प्रवीन बेताला, नताशा बेताला और बहन जियाना ने बालोतरा के श्रावक-श्राविका समाज को दीक्षा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।
विज्ञापन


बचपन से ही आध्यात्मिक जीवन की ओर झुकाव
राजस्थान के बोरावड़ से जुड़ा बेताला परिवार इन दिनों जहान के दीक्षा लेने के निर्णय को लेकर चर्चा में है। प्रवीन बेताला और नताशा बेताला के इकलौते बेटे जहान ने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन धर्म के संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ने का निर्णय लिया है। वर्तमान में जहान गुजरात के सूरत में रह रहे हैं।

परिवार के अनुसार, जब जहान करीब 12 वर्ष के थे, तभी से उनके मन में त्याग और संयम के विचार आने लगे थे। समय के साथ आध्यात्मिक जीवन के प्रति उनका झुकाव बढ़ता गया और यह भावना दृढ़ संकल्प में बदल गई। इसके बाद उन्होंने जैन दीक्षा ग्रहण करने का फैसला किया। जैन परंपरा में दीक्षा को जीवन का महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जाता है। इसमें व्यक्ति सांसारिक सुख-सुविधाओं और पारिवारिक जीवन से अलग होकर धर्म, अनुशासन, साधना और आत्मकल्याण को प्राथमिकता देने का संकल्प लेता है।
विज्ञापन


साध्वी मंगलप्रज्ञाजी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा संकल्प
जहान के दीक्षा निर्णय में परिवार ने साध्वी मंगलप्रज्ञा के मार्गदर्शन को महत्वपूर्ण बताया है। साध्वी मंगलप्रज्ञा इन दिनों बालोतरा में चातुर्मास कर रही हैं। परिवार के मुताबिक, उनके मार्गदर्शन से जहान को आध्यात्मिक मार्ग को समझने और अपने संकल्प की दिशा में आगे बढ़ने में सहायता मिली। परिवार के अनुसार, साध्वी मंगलप्रज्ञा ने जहान के माता-पिता को भी उनके निर्णय को समझने और इस प्रक्रिया के लिए तैयार होने में मार्गदर्शन दिया। अपने इकलौते बेटे को सांसारिक जीवन से अलग संयम के मार्ग पर आगे बढ़ते देखना परिवार के लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है।

जहान के दैनिक जीवन, दीक्षा के बाद की दिनचर्या और साधना से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। फिलहाल परिवार दीक्षा समारोह की तैयारियों और समाज को आमंत्रित करने में जुटा है।

18 जनवरी 2027 को लाडनूं में होगा दीक्षा समारोह
जहान बेताला की दीक्षा के लिए 18 जनवरी 2027 की तारीख निर्धारित की गई है। समारोह राजस्थान के लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में होगा। इस अवसर पर आचार्य महाश्रमणजी के सान्निध्य में जहान जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे।

जैन परंपरा में दीक्षा को आत्मसंयम, अहिंसा, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना के प्रति समर्पण का मार्ग माना जाता है। दीक्षा लेने वाला व्यक्ति धार्मिक सिद्धांतों के अनुरूप जीवन जीने का संकल्प लेता है। जहान के लिए यह समारोह उनके आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत होगा। इस अवसर पर परिवार के साथ बोरावड़ से जुड़े लोगों और जैन समाज की भी सहभागिता रहने की उम्मीद है। परिवार ने समाज के लोगों से समारोह में पहुंचकर जहान को आशीर्वाद देने का आग्रह किया है।

बहन जियाना और माता-पिता ने समाज को दिया निमंत्रण
दीक्षा समारोह में समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जहान की बहन जियाना और उनके माता-पिता प्रवीन बेताला एवं नताशा बेताला ने बालोतरा के श्रावक-श्राविका समाज को आमंत्रित किया है।
परिवार ने समाज के लोगों से 18 जनवरी 2027 को लाडनूं पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने और जहान को आशीर्वाद देने का अनुरोध किया है। परिवार के लिए यह अवसर भावनात्मक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। एक ओर जहान अपने जीवन की नई दिशा में कदम रखेंगे, वहीं दूसरी ओर परिवार उनके संकल्प का सहभागी बनेगा।

संयम और साधना की राह पर शुरू होगी नई यात्रा
जहान बेताला का निर्णय आध्यात्मिक जीवन के प्रति उनके लंबे समय से विकसित हो रहे झुकाव को दर्शाता है। जैन धर्म में संयम को केवल बाहरी त्याग तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इसे विचारों, व्यवहार और जीवन के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव से भी जोड़ा जाता है।

18 जनवरी 2027 को लाडनूं में होने वाला दीक्षा समारोह जहान के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। आचार्य महाश्रमणजी के सान्निध्य में दीक्षा ग्रहण करने के बाद वह संयम और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। इस अवसर पर परिवार ने बालोतरा के श्रावक-श्राविका समाज को आमंत्रित किया है और अब समारोह की तैयारियां की जा रही हैं।
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें