नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोप में बंद आसाराम की तीसरी दीपावली भी जोधपुर केन्द्रीय कारागार के भीतर ही मनेगी। आसाराम बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे हैं, लेकिन विभिन्न कोर्टों में आधा दर्जन से अधिक प्रयास में से अब तक एक भी जमानत के लिए सफल नहीं हो सकता है। हाल ही उच्चतम न्याययाल ने कहा है कि न्यायिक हिरासत में ही जोधपुर एम्स में आसाराम का इलाज होगा। अब अगली सुनवाई 21 नवम्बर को होगी।
पिछले दिनों तबीयत खराब होने का कारण बताते हुए जमानत का भरसक प्रयास किया, लेकिन अदालतों ने उनकी मांग को खारिज कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने तक अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। पिछली सुनवाई में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों के बोर्ड ने कोर्ट में रिपोर्ट दाखिल की थी।
बोर्ड ने अपने रिपोर्ट में कहा कि आसाराम का स्वास्थ्य स्थिर है। मामले के तहत आसाराम के मध्यप्रदेश स्थित गुरूकुल में पढऩेवाली नाबालिग छात्रा ने 20 अगस्त 2013 को दिल्ली में मामला दर्ज कराया था कि आसाराम ने 15 अगस्त 2013 की रात को जोधपुर के मणाई आश्रम में दुष्कर्म किया है।
पुलिस ने पॉक्सो एक्ट की संगीन धाराओ के तहत मामला दर्ज किया और 31 अगस्त 2013 को इन्दौर के आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार किया। उसके बाद से आसाराम लगातार जोधपुर जेल में ही बंद है। आसाराम और उनके सहयोगी शिवा, शिल्पी, शरद और प्रकाश को दुष्कर्म और पॉक्सो की धाराओं में 13 फरवरी 2014 आरोप सुनाए गए।