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Rajasthan: अंगारे बरसाती गर्मी में आग के बीच तपस्या, सिर पर जलती मटकी रख बाबा कर रहे साधना

Tue, 12 Apr 2022 06:39 PM IST
रोमा रागिनी न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर

सार

आग के बीच साधना करने वाले बाबा का कहना है कि उन्हें गर्मी का एहसास नहीं होता। वो 17 साल से ये साधना करते आ रहे हैं।
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बाड़मेर में बाबा का हठयोग - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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राजस्थान में गर्मी से एक तरफ आमजन परेशान हैं। अभी लोग घर से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं लेकिन बाड़मेर में एक बाबा हैं, जो 45 डिग्री के तापमान के बीच आग के घेरे में बैठकर हठयोग कर रहे हैं। बाबा का कहना है कि वे 17 साल से हठयोग कर रहे हैं। बाबा पहले आग का घेरा बनाते हैं। मटकी में भी आग लगाकर वो सिर पर रख लेते हैं और घेरे के अंदर बैठकर साधना करते हैं।

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आग के बीच साधना - फोटो : Amar Ujala Digital
बाड़मेर के शिव मुंडी गणेश मंदिर के पास बैठकर बाबा साधना कर रहे हैं। बाबा सियाराम मूल रूप से उड़ीसा के रहने वाले हैं। सियाराम महाराज ने 13 साल की उम्र में बनारस आश्रम में संन्यास लेकर सीताराम महाराज से दीक्षा ली थी। बाबा साल 2010 में बाड़मेर आए थे, तब से यहीं हैं। उन्होंने बताया कि हठ योग 18 साल के लिए होता है। बाबा कहना है कि यह तपस्या सदियों से चली आ रही है। आज के समय में यह तपस्या कम साधु-संत ही करते हैं।

 

बाड़मेर में आग के बीच साधना - फोटो : Amar Ujala Digital
आग की आंच की बीच तपस्या
 बाबा सियाराम दोपहर करीब 12 बजे चारों तरफ गोबर के कंडे जलाकर बैठ जाते हैं। आग की आंच के बीच में तपस्या करते हैं। फिर मटकी में आग लगाकर सिर पर रख लेते हैं।

 

बाबा का कहना-इससे होता है जनकल्याण
बाबा सियाराम का कहना है कि 18 साल का हठ योग अनुष्ठान है। हर साल चार महीने का होता है। यह तपस्या जन कल्याण के लिए कर रहे हैं। बाबा कहना है कि 17 साल से मैं हठ योग तपस्या कर रहा हूं। 2005 में तपस्या शुरू की थी। गुरु के निर्देश से तपस्या कर रहा हूं। इस तपस्या से जनता का कल्याण होगा। कई लोग कहते हैं कि हठ योग नहीं करना चाहिए, लेकिन आदिकाल से हठ योग होता आ रहा है।

 

चालीस साल तक दादा ने की थी तपस्या
बाबा का कहना है कि मेरे दादा गुरु सीताराम ने बाड़मेर शिव मूंडी के नीचे आश्रम बनाया था। दादा गुरु ने चालीस साल तक यहां पर रहकर तपस्या की थी। दादा गुरु ने मुझे यहां पर बुलाया था। तब से यहीं पर हर साल गर्मी के मौसम में तपस्या करता हूं।

हठयोग का होता है कोर्स
बाबा सियाराम का कहना है कि हठयोग कोर्स में अनुष्ठान चार महीने में गर्मी के समय में किया जाता है। माघ की वसंत पंचम से लेकर ज्येष्ठ गंगा दशहरा तक अनुष्ठान होता है। इस अनुष्ठान में धूप से कोई लेना-देना नहीं होता है। जब तक जप करते हैं तब तक न तो गर्मी लगती है और न ही आग का तप लगता है।

 
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 तीन-तीन साल के छह कोर्स
बाबा सियाराम के मुताबिक अग्नि तपस्या (साधना) में छह कोर्स होते हैं। सभी कोर्स तीन-तीन साल के होते हैं। पंच धूनी (3 साल), सप्त धूनी (6 साल), द्वादश धूनी(9 साल), चौरासी धूनी (12 साल), कोट धूनी(15 साल) और खपर धूनी (18 साल) होती है। अभी खपर धूनी चल रही है।

 
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