अलवर में मॉब लिचिंग को लेकर सियासत जारी है। इस घटना के विरोध में भाजपा गहलोत सरकार पर लगातार हमलावर है। वहीं मृतक किसान के घर पहुंचे भाजपा के पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने विवादित बयान दिया।
ज्ञानदेव आहूजा ने कहा कि जुबैर खान मृतक के परिजन को नौकरी देने की बात कह गए हैं। नौकरी कौन सी सरकारी है, वह तो संविदा की है। ज्ञानदेव आहूजा ने आगे कहा कि ये पहली बार हुआ है कि उन लोगों ने एक मारा है। अब तक तो पांच हमने मारे हैं। मैंने हमारे लोगों को और कार्यकर्ताओं को छूट दे रखी है। मारो, बरी भी करवा देंगे, जमानत भी करवा देंगे।
भाजपा नेताओं की भाषा ही ऐसी है
पूर्व विधायक के बयान की मेवात विकास बोर्ड के चेयरमैन जुबैर खान ने निंदा की है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं की ऐसी ही भाषा है। ये न तो किसी की मदद करने वाले हैं, न कोई विकास करने वाले हैं। जुबैर खान ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद मिले, नौकरी में मदद हो। जिन्होंने हत्या की है उन्हें सजा मिले।
आहूजा ने दी सफाई
वहीं बयान को लेकर ज्ञानदेव आहूजा ने मीडिया को सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि मेरे बयान का गलत अर्थ न निकाले। मॉब लिंचिंग में अब से पहले जो लोग मारे गए, वे गौ तस्करी के आरोपी थे, गोकशी के घटनाओं में शामिल थे। धर्म विशेष की भावनाओं के साथ खेल रहे थे। इसलिए वे मारे गए। जबकि चिरंजीलाल ने कोई गुनाह नहीं किया था। फिर भी उसे पीट-पीटकर मार डाला गया।
क्या था मामला
अलवर जिले के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के रामबास में किसान चिरंजीलाल शौच करने खेत में गया था। उसी दौरान अलवर के सदर थाना क्षेत्र से चोर एक ट्रैक्टर को चोरी करके आ रहे थे। सदर थाना पुलिस और ट्रैक्टर मालिक चोरों का पीछा कर रहे थे। चोरों ने अपने आप को पुलिस और ट्रैक्टर मालिकों से घिरा देख ट्रैक्टर को बिजली घर के पास स्थित एक खेत में छोड़ दिया और वहां से भाग गए। इतने में ही पुलिस से पहले ट्रैक्टर के मालिक खेत में पहुंच गए। 20 से 25 समुदाय विशेष के लोगों ने नित्य क्रिया करने गए चिरंजी को चोर समझकर बुरी तरह से पीट दिया। जिससे चिरंजीलाल की मौत हो गई।