अलवर में दीपावली पर ग्रीन पटाखों के नाम से हर तरह के पटाखे बिके। अफसर भी यह नहीं पहचान सके की ग्रीन पटाखे कौन से हैं। केवल क्यूआरकोड चिपका कर ग्रीन पटाखे बेचे गए। लेकिन असल में अधिकतर जगहों पर लाल पटाखे ही चले, जिसके कारण दिवाली की अगली सुबह एक नवंबर को अलवर शहर का AQI बढ़कर 153 पहुंच गया था। यह तो मोतीडूंगरी के आसपास की जगह का प्रदूषण का स्तर रहा। एमआईए और दिल्ली रोड की तरफ का एक्यूआई इससे भी अधिक रहा है।
वहीं, भिवाड़ी में एक नवंबर को एक्यूआई 313 को पार कर गया था। हालांकि, दीपावली के दो दिन बाद अब चार नवंबर की सुबह यह वापस 297 पर आ गया। जबकि अलवर में चार नवंबर की सुबह का एक्यूआई 111 आ गया था। सबसे बड़ी बात ये रही कि दीपावली पर दो घंटे के लिए ग्रीन पटाखे चलाने के आदेश आये थे। लेकिन इन ग्रीन पटाखों की आड़ में सभी तरह के पटाखे खरीदे ओर बेचे गए और चलाये भी गए। यह आदेश राज्य के पर्यवरण मंत्रालय द्वारा आखरी दिनो में जारी किए गए थे। लेकिन इन आदेशों में इन पटाखों से जो प्रदूषण फैलेगा, उसका कहीं कोई जिक्र तक नहीं किया गया।
सबसे बड़ी बात यह है कि एनसीआर क्षेत्र में होने के कारण अलवर का प्रदूषण स्तर पहले ही बहुत अधिक है और यहां ग्रेप 1 की पाबंदियां भी लागू हो चुकी हैं। इसके बावजूद प्रदूषण का स्तर कम करने के बजाय सरकार द्वारा उसे बढ़ाने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। ग्रेप 1 लागू होने के बाद अलवर में कचरा जलाने पर भी पाबन्दी लगा दी गयी थी। लेकिन लोग और नगर निगम दीपावली पर घरों से निकले वाले कचरे को भी अग्यारा भेजने की बजाय यहां वहां जला रहे थे। इस काम में निगम के सफाई कर्मचारी भी शामिल रहे। उस पर रही सही कसर सरकार ने पूरी कर दी। पटाखों पर दो घंटे की अनुमति देकर। इसका फायदा उठाकर लोगों ने धड़ल्ले से पटाखे चलाये। हालांकि, यह अनुमति रात दस बजे तक थी। लेकिन जिला अस्पताल के बाहर युवक रात ग्यारह बजे तक भी पटाखे चलाते दिखाई दिए।