अलवर नगर निगम में 2012 की सफाई कर्मचारी भर्ती के मामले में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भाजपा नेता संजय शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह भर्ती मामला न्यायालय में विचाराधीन था और 2019 में न्यायालय का फैसला सफाई भर्ती के अभ्यर्थियों के पक्ष में आया था। संजय शर्मा के मुताबिक, इसके बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। शर्मा ने बताया कि आज पांच लोगों को नियुक्ति पत्र भी बांटे गए।
गहलोत सरकार ने मामले को ठंडे बस्ते में डाला
संजय शर्मा ने कहा कि 2019 में कांग्रेस की सरकार थी और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। उनके अनुसार, गहलोत सरकार ने चार साल तक इस मामले में कुछ नहीं किया और नियुक्ति देने के मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
दिसंबर 2023 के बाद सरकार के सामने उठाया मामला
संजय शर्मा ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्होंने पत्राचार के जरिए इस विषय को सरकार के संज्ञान में लाया। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सकारात्मक निर्देशों के बाद सरकार सफाई कर्मचारियों को भर्ती करने की दिशा में आगे बढ़ी। हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढीलेपन के कारण सफाई कर्मचारियों को उनका हक मिलने में काफी समय लग रहा था।
नगर निगम पहुंचकर अधिकारियों को दिए नियुक्ति के निर्देश
संजय शर्मा ने बताया कि वह खुद सफाई कर्मचारियों के पास नगर निगम पहुंचे और उनके साथ बैठकर अधिकारियों को बुलाया। उन्होंने अधिकारियों को नियुक्ति के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। इसी दौरान पांच लोगों को सफाई कर्मचारी के नियुक्ति पत्र सौंपे गए।
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पात्र अभ्यर्थियों को भी मिलेगी नियुक्ति
संजय शर्मा ने बताया कि मामले में एक जांच कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी सभी जरूरी दस्तावेजों की जांच करेगी। जांच में जो अभ्यर्थी पात्र पाए जाएंगे, उन्हें नियुक्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। संजय शर्मा ने कहा कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए नियुक्ति पत्र जारी कराने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का वह हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।