बाड़ेबंदी की जरूरत क्यों?
राज्यसभा की चार सीटों के लिए पांच उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया है। कांग्रेस ने मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रमोद तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने घनश्याम तिवाड़ी को प्रत्याशी बनाया है। वहीं सुभाष चंद्रा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल किया है, लेकिन भाजपा ने उन्हें समर्थन दे दिया है। कारोबारी सुभाष चंद्रा का कांग्रेस सहित कुछ निर्दलीय विधायकों से सीधा संपर्क है। नामांकन के बाद सुभाष चंद्रा ने कहा था, मैंने पहले निर्दलीयों से बात की है। भाजपा आलाकमान से इजाजत लेकर ही चुनाव में उतरा हूं। मैं राजस्थान में जन्मा हूं, बाहरी नहीं हूं।
चुनाव का गणित समझिए
कांग्रेस के पास 108 विधायक हैं। एक राज्यसभा प्रत्याशी को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए, इस तरह से कांग्रेस की दो सीटें तय हैं। इसके बाद भी कांग्रेस के पास 26 वोट बचेंगे, लेकिन तीसरी सीट जीतने के लिए 15 वोट और चाहिए होंगे। वहीं, भाजपा के पास 71 विधायक हैं। इस लिहाज से एक सीट पर जीत पक्की है, लेकिन दूसरी सीट जीतने के लिए उसे 11 वोट और चाहिए। ऐसे में पूरा दारोमदार निर्दलीय सहित अन्य पार्टियों के विधायकों पर है। बतादें कि कांग्रेस को 13 निर्दलीय, भारतीय ट्राइबल पार्टी और माकपा के दो-दो विधायकों का समर्थन मिला हुआ है।
ताज अरावली में 130 कमरे बुक
कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ेबंदी की व्यवस्था उदयपुर के ताज ताज अरावली होटल में की है। अभी तक गहलोत सरकार के करीब 65 से अधिक विधायक और मंत्री यहां पहुंच गए हैं। विधायकों के लिए होटल में 130 कमरे बुक करवाए गए हैं। होटल के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। पुलिस जवानों के साथ आला अधिकारी भी यहां मौजूद हैं। होटल में आने वाले बाहरी व्यक्ति को पूछताछ के बाद ही अंदर जाने दिया जा रहा है।
यह विधायक बाड़ेबंदी में नहीं पहुंचे
नाराज चल रहे विधायकों खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मना रहे हैं। इसके बाद भी बसपा से कांग्रेस में आए विधायक राजेंद्र गुढ़ा, वाजिब अली, संदीप यादव, लाखन सिंह और गिर्राज सिंह मलिंगा उदयुपर नहीं गए हैं। निर्दलीय विधायक ओमप्रकाश हुड़ला सहित अन्य निर्दलीय एमएलए भी बाड़ेबंदी में शामिल नहीं हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए यह चिंता का कारण बन सकता है।