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Rajasthan: रिजर्व लिस्ट के आधार पर नियुक्ति का अधिकार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने आरपीएससी के पक्ष में दिया फैसला

Fri, 16 Jan 2026 09:30 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

Rajasthan: कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती-2013 एवं 2019 और सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती- 2020  से संबंधित एक केस का फैसला करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरपीएससी को बड़ी राहत दी है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग  की अपीलों पर गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल रिजर्व या वेटिंग लिस्ट में नाम होने मात्र से किसी उम्मीदवार को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता है। प्रकरण में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ एवं खंडपीठ के उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिसमें आयोग को नियमों में अंकित अवधि के व्यतीत हो जाने के बावजूद रिजर्व लिस्ट से उम्मीदवारों को नियुक्त करने के निर्देश दिए गए थे।  
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क्या था मामला?
आयोग के संयुक्त विधि परामर्शी राकेश ओझा ने बताया कि यह प्रकरण कनिष्ठ विधि अधिकारी भर्ती-2013 एवं 2019 और सहायक सांख्यिकी अधिकारी भर्ती- 2020  से संबंधित था। इसमें मुख्य सूची के कुछ अभ्यर्थियों द्वारा कार्यभार ग्रहण न करने के कारण रिक्त रहे पदों पर आरक्षित सूची के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग करते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी। इस पर वेटिंग लिस्ट में शामिल यति जैन, आकृति सक्सेना और विवेक कुमार मीणा जैसे उम्मीदवारों की याचिका पर राजस्थान उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए थे, जिसे आयोग ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील दायर कर चुनौती दी थी, परंतु खंडपीठ ने एकलपीठ के निर्णय को यथावत रखते हुए आयोग की अपील को खारिज कर दिया था। अंततः आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु: 
नियमों की सर्वाच्चता: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि राजस्थान सेवा नियमों  के अंतर्गत आरक्षित सूची की वैधता मुख्य सूची भेजे जाने की तिथि से केवल 6 माह के लिए होती है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद सूची निष्प्रभावी हो जाती है।
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कानूनी अधिकार का अभावः न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने व्यवस्था दी कि केवल आरक्षित सूची में नाम होने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का कोई अपरिहार्य कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता।

आयोग की स्वायत्तताः न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान लोक सेवा आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है। राज्य सरकार द्वारा अपील न करने की स्थिति में भी आयोग को भर्ती नियमों की रक्षा हेतु अपील करने का पूर्ण अधिकार है।

भर्ती प्रक्रिया की शुचिताः निर्णय में उल्लेख किया गया कि यदि चयन प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक खुला रखा जाता है, तो यह आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे नए पात्र अभ्यर्थियों के अवसरों का हनन होगा।

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नियमों के खिलाफ जाकर नहीं दे सकते नियुक्ती 
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णयों को रद्द करते हुए अपने निर्णय में यह कहा कि हालांकि अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति हो सकती है, किंतु स्थापित नियमों और समय सीमा के विरुद्ध जाकर नियुक्तियों का आदेश नहीं दिया जा सकता।
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