अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर नीरज जैन
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अजमेर की आना सागर झील और उसके आसपास हुए अवैध निर्माणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के फैसले को सही माना है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार की नीतियां न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि अजमेर की जनता के लिए भी हानिकारक साबित हुईं।
जलभराव और बाढ़ के लिए गहलोत सरकार जिम्मेदार: नीरज जैन
डिप्टी मेयर नीरज जैन ने कहा कि गहलोत सरकार के गलत फैसलों की वजह से अजमेर को बाढ़ जैसी आपदा का सामना करना पड़ा। जलभराव के कारण शहर की जनता को भारी नुकसान हुआ और कई इलाकों में पांच दिनों तक पानी भरा रहा।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार
नीरज जैन ने आरोप लगाया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हुए कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। अफसरों की मनमानी और भ्रष्टाचार के कारण जनता की मेहनत की कमाई बर्बाद हो गई, जिससे केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना को भी नुकसान पहुंचा।
भाजपा सरकार ने मांगा अवैध निर्माण हटाने के लिए समय
भजनलाल शर्मा सरकार ने एनजीटी के आदेशों का सम्मान करते हुए अवैध निर्माण हटाने के लिए छह महीने का समय मांगा है। जबकि, कांग्रेस सरकार ने एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की और झूठे शपथ पत्र देकर कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।
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दोषी अफसरों पर कार्रवाई की मांग
नीरज जैन ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि इस मामले में दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और उनकी लापरवाही व भ्रष्टाचार की वजह से हुए नुकसान की भरपाई उनसे करवाई जाए। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि वर्तमान सरकार एनजीटी के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आना सागर झील और अजमेर शहर की समस्याओं का समाधान करेगी।
भ्रष्टाचार और लापरवाही का उदाहरण बना अजमेर
यह मामला सिर्फ अवैध निर्माणों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का भी बड़ा उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साबित हो गया है कि पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों ने अजमेर को जलभराव और बर्बादी के कगार पर ला खड़ा किया। अब देखना होगा कि दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है और जनता को न्याय कब तक मिलता है।