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Ajmer News: यूरोपीय संघ के देशों के प्रतिनिधिमंडल ने की दरगाह जियारत, देश की संस्कृति और आध्यात्म को जाना

Fri, 11 Oct 2024 09:58 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

भारत देश की संस्कृति और आध्यात्मिक की जानकारी लेने सात समंदर पार के अलग-अलग देशों के 25 सदस्यों के दल ने ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पहुंचे और उन्होंने ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में जियारत की। सभी विदेशी पर्यटकों ने दरगाह में एक-एक परिसर को देखा और वहां रह रहे लोगों के बारे में जानने की कोशिश की।
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यूरोपीय संघ देशों के प्रतिनिधिमंडल ने की दरगाह जियारत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आध्यात्मिक एकता के एक ऐतिहासिक क्षण में हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती, गद्दी नशीन दरगाह अजमेर शरीफ़ और अध्यक्ष चिश्ती फाउंडेशन ने यूरोपीय संघ के देशों के 25 सदस्यीय विशिष्ट प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह प्रतिनिधिमंडल पहली बार भारत की यात्रा पर आया था। जिसमें फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन, जर्मनी, पोलैंड, स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों के नागरिक शामिल थे। इस यात्रा का उद्देश्य सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समझ को बढ़ावा देना था।
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प्रतिनिधिमंडल ने सूफ़ी दरगाह अजमेर शरीफ़, जहां हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का मज़ार है, पर विशेष ज़ियारत की। हजरत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को पूरी दुनिया में उनके बिना भेदभाव प्रेम और मानवता की सेवा के संदेश के लिए जाना जाता है। इस अवसर पर हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती ने चिश्ती सूफ़ी सिलसिले के शाश्वत मूल्यों पर प्रकाश डाला, जो दरगाह शरीफ़ की प्रमुख आध्यात्मिक शिक्षाओं का प्रतिबंधित हैं। “सभी से प्रेम करो, किसी से द्वेष नहीं।” साथ ही उन्होंने प्रार्थना, ध्यान और सेवा को जीवन जीने के महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।

हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती ने प्रतिनिधिमंडल के समक्ष सूफ़ी शिक्षाओं की आध्यात्मिक गहराई को साझा किया, जिसमें ज़िक्र अल्लाह (ईश्वर का स्मरण) और फ़िक्र (गहन ध्यान) के महत्व को रेखांकित किया, जो सूफ़ी आध्यात्मिक साधनों का मूल हैं। इन प्रथाओं के माध्यम से, व्यक्ति ईश्वर से गहरा संबंध स्थापित करता है, करुणा, निस्वार्थता और मानव कल्याण के प्रति ज़िम्मेदारी को विकसित करता है।
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उन्होंने ख़िदमत (सेवा) की चिश्ती परंपरा की प्रतिबद्धता पर भी चर्चा की और बताया कि सच्ची आध्यात्मिकता मानवता की सेवा में प्रकट होती है। “सबसे उच्च प्रकार की इबादत मानवता की सेवा है,” हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती ने कहा और ख़्वाजा गरीब नवाज़ के संदेश को दोहराया, जिन्होंने अपना जीवन दूसरों के दुखों को दूर करने और शांति का संदेश फैलाने में समर्पित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने अजमेर शरीफ़ के पवित्र वातावरण का अनुभव किया। जो सदियों से दुनिया भर के आध्यात्मिक साधकों को आकर्षित करता रहा है। इस यात्रा में विशेष प्रार्थनाओं के साथ एक मार्गदर्शित ज़ियारत (तीर्थयात्रा) भी शामिल थी, जहा हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती ने वैश्विक शांति और समझ के लिए प्रार्थना की और प्रतिनिधिमंडल तथा उनके देशों के लिए दुआएं की
हाजी सैय्यद सलमान चिश्ती ने अपने संदेश में आगंतुकों को याद दिलाया कि दरगाह अजमेर शरीफ़ सार्वभौमिक प्रेम और करुणा का प्रतीक है, जो सीमाओं से परे जाकर साझा आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से मानवता को एकजुट करता है।

उन्होंने उनके दौरे के लिए गहरी आभार प्रकट की और कहा कि इस तरह के आदान-प्रदान आपसी सम्मान, सद्भाव और वैश्विक शांति के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिक संवाद किस प्रकार संस्कृतियों के बीच सेतु का कार्य कर सकता है और प्रेम, सहानुभूति, और सहयोग पर आधारित भविष्य का निर्माण कर सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने सूफ़ी सिद्धांतों और अजमेर शरीफ़ की समृद्ध आध्यात्मिक धरोहर की गहरी समझ के साथ विदा ली, और “सभी से प्रेम, किसी से द्वेष नहीं” का संदेश अपने समुदायों और जीवन में आगे बढ़ाने का संकल्प किया।
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