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Ajmer News: महाशिवरात्रि से पहले विवाद, अजमेर दरगाह में रुद्राभिषेक करने की मांग, जिला कलेक्टर को लिखा पत्र

Sat, 14 Feb 2026 05:58 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

Ajmer News: महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने शनिवार को अजमेर जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक और शिव पूजा की अनुमति मांगी है।
 
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महाशिवरात्रि पर अजमेर दरगाह में रुद्राभिषेक की अनुमति की मांग
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विस्तार
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महाशिवरात्रि पर्व से पहले अजमेर में एक बार फिर धार्मिक और ऐतिहासिक बहस गर्मा गई है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने अजमेर दरगाह परिसर में रुद्राभिषेक और शिव पूजा की अनुमति देने के संबंध में अजमेर जिला कलेक्टर को औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने महाशिवरात्रि के अवसर पर शांतिपूर्ण ढंग से धार्मिक अनुष्ठान कराने की अनुमति मांगी है।

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पत्र में दरगाह को बताया शिव मंदिर
डॉ परमार ने कलेक्टर को लिखे अपने पत्र में कहा है कि अजमेर दरगाह परिसर लंबे समय से प्राचीन हिंदू शिव मंदिर से जुड़ा हुआ माना जाता रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था सनातन धर्म की परंपराओं और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर यह मांग कर रही है कि महाशिवरात्रि जैसे पवित्र पर्व पर शिवभक्तों को वहां रुद्राभिषेक करने का अधिकार मिले।

शांतिपूर्ण कार्यक्रम करने का वादा 
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन को पूरा सहयोग दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उचित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न उत्पन्न हो।
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डॉ. परमार ने क्या कहा?
डॉ. परमार ने कहा कि उनकी संस्था समाज में सौहार्द और ऐतिहासिक सत्य को उजागर करने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। उन्होंने पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि महाशिवरात्रि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का पर्व है और इस अवसर पर रुद्राभिषेक की अनुमति देने से धार्मिक स्वतंत्रता को बल मिलेगा।

दरगाह से पहले मंदिर का दावा
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि डॉ. परमार ने अजमेर दरगाह में प्राचीन हिंदू शिव मंदिर होने का दावा न्यायालय में भी पेश किया है। उन्होंने अदालत में याचिका दाखिल कर कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्थल मूल रूप से शिव मंदिर रहा है। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 21 फरवरी को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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प्रशासन ने ऐसा पत्र मिलने से किया इंकार
बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न संगठनों और श्रद्धालुओं में उत्सुकता है कि प्रशासन और न्यायालय इस पर क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल जिला प्रशासन ने पत्र प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की है।

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