अजमेर जिले के कोटड़ा निवासी और वायुसेना के जवान पुलकित टाक की गोली लगने से मौत हो गई। पश्चिम बंगाल के हासीमारा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात 26 वर्षीय पुलकित ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा भी रह चुके थे। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर अजमेर लाया गया, जहां पुष्कर रोड स्थित श्मशान गृह में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर और गमगीन माहौल
एयरफोर्स अधिकारियों ने परंपरा अनुसार तिरंगा में लिपटा जवान पुलकित का पार्थिव शरीर उनके पिता राजेंद्र प्रसाद टाक को सौंपा। जैसे ही यह दृश्य सामने आया, पूरा माहौल गमगीन हो गया और लोगों की आंखें नम हो गईं। हजारों की संख्या में ग्रामीण और परिचित अंतिम यात्रा में शामिल हुए और गम व गर्व के बीच अपने लाल को विदाई दी।
घटना की जांच में जुटी एयरफोर्स
पुलकित के पिता ने बताया कि 9 सितंबर की शाम बेटे को गोली लगी थी, जिसकी सूचना परिवार को 10 सितंबर को दी गई। फिलहाल घटना के कारणों की जांच एयरफोर्स द्वारा की जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में खुदकुशी की आशंका जताई गई है, लेकिन इस पर न तो परिवार और न ही वायुसेना अधिकारियों ने कोई टिप्पणी की है।
बचपन से था सेना में जाने का सपना
पुलकित परिवार के इकलौते बेटे थे। पिता राजेंद्र प्रसाद, मां और दो बड़ी बहनों के साथ उनका छोटा सा परिवार है। बचपन से ही उनका सपना सेना में जाने का था। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2018 में वायुसेना जॉइन की थी। उनकी पहली पोस्टिंग बेंगलुरु में हुई थी, जबकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे फिरोजपुर में तैनात रहे।
छुट्टी के बाद लौटे थे ड्यूटी पर, चार दिन बाद आई दुखद खबर
पुलकित 3 सितंबर को छुट्टी पर घर आए थे। 5 सितंबर को उन्होंने अपनी बहनों के साथ जयपुर में जन्मदिन मनाया और इसके बाद ड्यूटी पर लौट गए थे। लेकिन महज चार दिन बाद ही उनकी मौत की खबर से पूरा परिवार सदमे में डूब गया।
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अजमेर में शोक और गर्व का माहौल
परिजनों का कहना है कि पुलकित पढ़ाई में बेहद होशियार थे और उनका सपना पूरा होने के बाद भी उन्हें कम उम्र में ही खो देना परिवार के लिए असहनीय है। गांव और आसपास के लोग अंतिम यात्रा में उमड़े और गर्व के साथ गमगीन माहौल में विदाई दी।
एयरफोर्स अधिकारियों ने कहा कि घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही आधिकारिक बयान दिया जाएगा। पुलकित की स्मृतियां न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे गांव और अजमेर के लिए गर्व का विषय बनी रहेंगी।
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