ख्वाजा गरीब नवाज के 813वें सालाना उर्स में शिरकत करने के लिए पाकिस्तान से 89 जायरीनों का दल अजमेर पहुंचा है। दल के साथ पाकिस्तानी दूतावास के दो अधिकारी भी हैं। सोमवार देर रात यह जत्था स्पेशल ट्रेन के जरिए वाघा बॉर्डर से भारतीय सीमा में प्रवेश कर अजमेर पहुंचा।
ख्वाजा की दरगाह में पेश करेंगे चादर
पाकिस्तानी जायरीनों ने अजमेर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर ख्वाजा की नगरी में कदम रखने के लिए शुक्राना अदा किया। दल के सदस्य अपने साथ खूबसूरत मखमली चादर लाए हैं, जिसे गरीब नवाज की मजार पर पेश किया जाएगा। जायरीनों ने बताया कि वे दरगाह में जियारत कर दोनों देशों के लिए दुआ करेंगे। उन्होंने भारत द्वारा किए गए इंतजामों की सराहना भी की।
ठहरने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
इन जायरीनों के ठहरने की व्यवस्था सेंट्रल गर्ल्स स्कूल में की गई है। खाने-पीने और रहने की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद जायरीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच बसों के जरिए सेंट्रल गर्ल्स स्कूल ले जाया गया। सुरक्षा के लिए प्रशासन, पुलिस महकमा, जीआरपी और अन्य सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
ट्रेन के आगमन से पहले सीआईडी और जीआरपी ने रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा जांच की। हथियारबंद जवान, कमांडो और भारी पुलिस बल को स्टेशन के चारों ओर तैनात किया गया। सभी जायरीनों की काउंटिंग और चेकिंग के बाद उन्हें उनके ठहरने की जगह पर भेजा गया।
उर्स में आने के लिए पाकिस्तानी जायरीन के जत्थे का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है। वीजा के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं, जिनकी जांच-पड़ताल के बाद जायरीनों का चयन किया जाता है। यह परंपरा 14 सितंबर 1974 को भारत-पाक के बीच हुए धार्मिक वीजा समझौते के तहत जारी है। पिछले 50 वर्षों से पाकिस्तानी जायरीन ख्वाजा गरीब नवाज के उर्स में शिरकत करने आ रहे हैं।
इस बार उर्स में शामिल होने वाले पाकिस्तानी जायरीनों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम रही। जहां पिछले साल 233 जायरीन आए थे, वहीं इस बार केवल 89 जायरीन ही अजमेर पहुंचे हैं। पहले यह संख्या 500 के करीब हुआ करती थी लेकिन अब इसमें लगातार कमी देखी जा रही है।