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Ajmer News: चार साल बाद राजस्थान बोर्ड को मिला नया अध्यक्ष, अब हनुमान सिंह राठौड़ संभालेंगे कमान

Sat, 20 Jun 2026 10:59 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

करीब चार वर्षों से रिक्त चल रहे राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष पद पर सरकार ने हनुमान सिंह राठौड़ की नियुक्ति की है। शिक्षा क्षेत्र में लंबे अनुभव रखने वाले राठौड़ तीन वर्ष तक बोर्ड की कमान संभालेंगे और सोमवार को पदभार ग्रहण करेंगे।
 
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हनुमान सिंह राठौड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद नया अध्यक्ष मिल गया है। शिक्षा विभाग ने शनिवार को जारी अधिसूचना में अजमेर जिले के पीसांगन निवासी हनुमान सिंह राठौड़ को बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। राठौड़ सोमवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण करेंगे।
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शिक्षा क्षेत्र का लंबा अनुभव
हनुमान सिंह राठौड़ शिक्षा जगत का लंबा अनुभव रखते हैं। वे सरकारी विद्यालय में प्राचार्य रह चुके हैं और वर्ष 2019 में सेवानिवृत्ति से लगभग सवा साल पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। वर्तमान में वे अजमेर के जयपुर रोड स्थित भूनाबाय क्षेत्र में निवास करते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी वे विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं।

क्या होगी नई प्राथमिकता?
इस अवसर पर राठौड़ ने कहा कि बच्चों और शिक्षकों का शैक्षणिक उन्नयन तथा बोर्ड परीक्षाओं का सुचारू और पारदर्शी संचालन उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत किए गए नवाचारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। साथ ही परीक्षा परिणामों में सुधार के साथ शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
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चुनौतियों के लिए तैयार
गौरतलब है कि जनवरी 2022 में रीट पेपर लीक प्रकरण के बाद तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डी.पी. जारोली को पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से बोर्ड अध्यक्ष का पद रिक्त था। ऐसे में हनुमान सिंह राठौड़ की नियुक्ति को राजस्थान की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उन्होंने कहा, 'हर जिम्मेदारी अपने साथ चुनौतियां लेकर आती है, लेकिन जीवनभर शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा रहने के कारण मैं बोर्ड की कार्यप्रणाली और आवश्यकताओं से भली-भांति परिचित हूं।'

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नई नियुक्ति के साथ अब शिक्षा जगत की निगाहें बोर्ड प्रशासन में पारदर्शिता, परीक्षा प्रबंधन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी रहेंगी।
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