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Ajmer News: दरगाह से ऐतिहासिक चिन्ह मिटाए जाने का आरोप, महाराणा प्रताप सेना ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

Mon, 09 Feb 2026 03:47 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर

सार

अजमेर में दरगाह परिसर से जुड़े कथित ऐतिहासिक साक्ष्यों की जांच की मांग करते हुए एक संगठन ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर यथास्थिति बनाए रखने की अपील की है। ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ लोग ऐतिहासिक चिन्हों को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
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विस्तार
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विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में हिंदू शिव मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग को लेकर महाराणा प्रताप सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से उनके वरिष्ठ अधिवक्ता एपी सिंह ने सोमवार को अजमेर जिला कलेक्टर लोकबंधु एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्थल पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और बदलाव पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
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इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ए.पी. सिंह ने बताया कि महाराणा प्रताप सेना द्वारा अजमेर जिला न्यायालय में याचिका दायर की गई है। उसी याचिका के संदर्भ में प्रशासन को अवगत कराया गया है ताकि पुरातत्व विभाग द्वारा निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जा सके। उन्होंने कहा कि न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद दरगाह कमेटी से जुड़े कुछ लोग कथित तौर पर ऐतिहासिक चिन्हों को मिटाने का प्रयास कर रहे हैं।

ए.पी. सिंह ने आरोप लगाया कि शिवलिंग, सप्तपदी संरचना, ओम चिन्ह, कमल पुष्प और नंदी से जुड़े निशानों को हटाने के लिए पेंटिंग, ग्राइंडिंग और खुदाई जैसे कार्य किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे न केवल ऐतिहासिक साक्ष्य नष्ट हो रहे हैं, बल्कि भविष्य में सत्य की जांच करना भी कठिन हो जाएगा। उन्होंने इसे ऐतिहासिक संरक्षण के नियमों का उल्लंघन बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।
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उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जब तक न्यायालय में लंबित याचिका का निर्णय नहीं हो जाता, तब तक स्थल की वर्तमान स्थिति यथावत रखी जाए। साथ ही पुरातत्व विभाग को मौके पर भेजकर पूरे परिसर का सर्वे कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोका जा सके।

जिला कलेक्टर लोकबंधु ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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महाराणा प्रताप सेवा की ओर से यह भी मांग की गई है कि जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार का निर्माण, रंगाई-पुताई या संरचनात्मक परिवर्तन न किया जाए। संगठन का कहना है कि यह मामला केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ा हुआ है।

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