अशोक गहलोत और असदुद्दीन ओवैसी
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गुटबाजी से जूझ रहीं कांग्रेस की और बढ़ेगी चिंता
राजस्थान में ओवैसी की एंट्री कांग्रेस (Congress) के लिए परेशानी बन सकती है। ओवैसी का पूरा फोकस अल्पसंख्यक वोटर्स पर रहेगा। प्रदेश के 15 जिलों की 36 विधानसभा सीट ऐसी हैं जहां मुस्लिमों का प्रभाव है। अब इस सीटों से एआईएमआईएम के प्रत्याशी चुनाव मैदान में होंगे। वहीं, अब तक प्रदेश का अल्पसंख्यक वर्ग कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता रहा है, लेकिन ओवैसी की एंट्री से कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लग सकती है। जिससे आने वाले चुनाव में कांग्रेस का समीकरण गड़बड़ा सकता है।
भाजपा में भी एकजुटता नहीं
राजस्थान भाजपा में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सबसे बड़ी खींचतान सीएम फेस को लेकर है। हालांकि, आलाकमान ने लगभग यह तय कर दिया है कि चुनाव मोदी के चहरे पर ही लड़ा जाएगा। इसके बाद भी अलग-अलग मौकों पर भाजपा नेताओं की गुटबाजी सामने आ जाती है। यह तो हुई भाजपा की बात अब चलते हैं चुनावी रणनीति पर।
भाजपा का हिंदुत्व के मुद्दे पर जोर रहता है। सबका साथ और सबका विकास, परिवारवाद और वंशवाद सहित अन्य मुद्दों पर फोकस करती है। कांग्रेस शासन काल की बात करें तो हिंदुत्व को लेकर भाजपा के पास कई मुद्दे हैं। कन्हैयालाल हत्याकांड, करौली दंगा, जोधपुर हिंसा सहित कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर भाजपा अशोक गहलोत सरकार पर हमलावर रहती है। हाल ही में राजस्थान आए अमित शाह ने इन सब मुद्दों का जिक्र किया था। इससे साफ है कि विधानसभा चुनाव में भी इनकी गूंज सुनाई देगी।
असदुद्दीन ओवैसी और अरविंद केजरीवाल
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नई पार्टियों के लिए कितनी आसान होगी राह
राजस्थान में केजरीवाल और ओवैसी का सियासी सफर कैसा रहेगा और उन्हें कितनी सफलता मिलेगी। इस पर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन, प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव में पहली बार चुनाव लड़ने वाली हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को चार सीटों पर सफलता मिली थी।