राजस्थान में अब ग्रामीण क्षेत्रों में मकान, दुकान, उद्योग या अन्य गैर-कृषि गतिविधियों के लिए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार ने भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है, जिससे आवेदक को आवेदन वाले दिन ही अनुमति आदेश मिल जाएगा।
ऑनलाइन प्रक्रिया और आवेदन शुल्क
नए नियमों के अंतर्गत सरकार ने कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत, पर्यटन, चिकित्सा, खेल परिसर, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा समेत 14 विभिन्न कार्यों के लिए रूपांतरित करने की स्वीकृति दी है। प्रीमियम राशि की गणना ऑनलाइन होगी और आवेदन जमा करते समय ही इस राशि का भुगतान करना होगा। सरकार ने आवासीय प्रयोजनों के लिए 2,000 रुपये और अन्य सभी गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए 20,000 रुपये का गैर-रिफंडेबल शुल्क तय किया है।
एक महीने में दस्तावेज की जांच
आवेदन के दिन ऑनलाइन अनुमति पत्र जारी होने के पश्चात उपखंड अधिकारी दस्तावेज की जांच करेंगे। इस प्रक्रिया के लिए एक महीने का समय निर्धारित किया गया है। यदि प्रस्तुत दस्तावेज सही पाए जाते हैं या निर्धारित 30 दिनों में कोई निर्णय नहीं लिया जाता, तो तीसवें दिन ऑनलाइन पोर्टल पर भूमि का नामांतरण और श्रेणी परिवर्तन अपने आप दर्ज हो जाएगा। इस 30 दिन की अवधि के दौरान आवेदक अपनी भूमि किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं कर सकेगा।
प्रीमियम दरें और उल्लंघन पर जुर्माना
सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के लिए डीएलसी दर के आधार पर अलग-अलग प्रीमियम दरें निर्धारित की हैं। स्वतंत्र उपयोग के लिए डीएलसी दर का 5 प्रतिशत, व्यावसायिक उपयोग के लिए 10 प्रतिशत, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 0.5 प्रतिशत तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 2.5 प्रतिशत प्रीमियम देय होगा। खातेदार को अधिकतम 500 वर्गमीटर भूमि पर अपना आवास या पशुशाला बनाने पर कोई प्रीमियम नहीं देना पड़ेगा। इसके अतिरिक्त नियमानुसार पात्र परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों को भी छूट मिलेगी।
गलत जानकारी दी, दो अनुमति निरस्त
यदि कोई आवेदक गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेज जमा करके अनुमति लेता है, तो सक्षम अधिकारी आदेश को तुरंत रद्द कर देंगे और प्रीमियम का दोगुना जुर्माना वसूलेंगे। बिना पूर्व अनुमति कृषि भूमि का गैर-कृषि उपयोग करने पर निर्धारित प्रीमियम का चार गुना जुर्माना लगेगा। इसकी निगरानी के लिए पटवारी वर्ष में कम से कम दो बार सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिनों के भीतर जिला कलक्टर के समक्ष अपनी अपील दायर कर सकता है।
निर्माण संबंधी शर्तें और प्रतिबंधित क्षेत्र
भूमि रूपांतरण की अनुमति मिलने का अर्थ यह नहीं होगा कि आवेदक तुरंत निर्माण कार्य प्रारंभ कर सकता है। इसके लिए आवेदक को ले-आउट और भवन निर्माण की अलग मंजूरी लेनी होगी। परियोजना स्थल तक पहुंचने के लिए कम से कम 30 फुट चौड़ा रास्ता होना अनिवार्य है। निर्धारित भूखंडों में वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करना आवश्यक किया गया है। साथ ही 500 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले मामलों में भवन मानचित्र की स्वीकृति अनिवार्य रहेगी।
इन क्षेत्रों पर रहेगा प्रतिबंध
राज्य सरकार ने कुछ क्षेत्रों में रूपांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नदी-नालों, तालाबों, प्राकृतिक जलस्रोतों, सार्वजनिक रास्तों, श्मशान घाटों, कब्रिस्तानों, अवाप्त की जा रही भूमियों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के रूपांतरण की अनुमति नहीं मिलेगी। डी-रेगुलेशन रिफॉर्म्स के चेयरमैन डॉ. भाग चंद बधाल ने बताया कि राज्य सरकार ने अप्रैल माह में एक विशेष समिति गठित की थी, जिसने अन्य राज्यों के नियमों का अध्ययन करने के उपरांत इन नए नियमों को तैयार किया है।