नाबालिग से दुराचार के आरोप में जोधपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत काट रहे आसाराम को मंगलवार को एक और बड़ा झटका लगा।
जोधपुर हाईकोर्ट ने आसाराम की रिहाई नामंजूर करते हुए कहा कि फिलहाल मामले के इस चरण को देखते हुए जमानत अर्जी स्वीकृत ही नहीं की जा सकती।
पिछली सुनवाई के दौरान पीडि़ता को पुरुषों के प्रति आकर्षित होनेवाली बीमारी व उसके बालिग होने की बात कहते हुए, इनसे सबंधित दस्तावेज पेश करने के लिए आसाराम के वकील राम जेठमलानी ने समय मांगा था, लेकिन वे मंगलवार को कोई भी पुख्ता दस्तावेज पेश नहीं कर पाए।
जेठमलानी के बहस के दौरान बार-बार मुद्दे से भटकने के कारण न्यायाधीश निर्मलजीत कौर ने भी उन्हें खरी-खरी सुनाई।
साथ ही, बहस के दौरान पीडि़ता के वकील ने आसाराम को कम उम्र की महिलाओं के प्रति आकर्षित होनेवाली बीमारी पेडोफाइल से ग्रस्त होने का आरोप लगाया। आसाराम की जमानत अर्जी पर सुनवाई करीब डेढ़ घंटे चली।
कुछ नया है तो बताइए...
राम जेठमलानी ने अपनी बहस का केन्द्र पीडि़ता के चरित्र पर रखा, लेकिन न्यायाधीश ने बार-बार टोकते हुए कहा कि वे ट्रायल के स्तर पर बहस कर रहे हैं कि आसाराम की जमानत अर्जी पर।
पिछली सुनवाई में भी जेठमलानी ने पीडि़ता के चरित्र पर व एफआईआर के तथ्यों पर अंगुली उठाई थी और इस बार भी ऐसा करने पर न्यायाधीश ने उन्हें रोकते हुए कहा कि पुरानी बात ही करते रहेंगे या मामले में कुछ नए दस्तावेज पेश करेंगे।
इसके बाद आसाराम को मामले में फंसाने की बात कहते हुए जेठमलानी ने तीन-चार शपथ पत्र पेश किए, जो पीडि़ता के गुरुकुल में नहीं रहना चाहने, उसके प्रेम प्रसंग होने व मानसिक रोगी होने से संबंधित थे।
पुलिस ने भी दी मजबूत दलील
न्यायालय में पुलिस ने भी आसाराम की जमानत अर्जी खारिज करने को लेकर मजबूत दलील पेश की।
न्यायाधीश ने जब पुलिस को राय देने के निर्देश दिए, तो पुलिस ने कहा कि अभी मुख्य आरोपी के जेल में बंद होने के बावजूद समर्थकों ने बार-बार कानून व्यवस्था बिगाड़ी है, लेकिन जमानत अर्जी मंजूर होने के बाद यदि वह जेल से बाहर आया, तो स्थितियां बेकाबू हो सकती हैं।
पुलिस ने यहां तक कहा कि मुख्य आरोपी के बाहर आने के बाद समर्थक दंगा तक कर सकते हैं।