श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की खुशी का ऐसा नजारा देश ओर दुनिया में शायद ही कही देखने को मिलता होगा। हम बात कर रहे राजस्थान के राजसमंद में स्थित वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथ जी मंदिर नाथद्वारा की। यहां जन्माष्टमी के अवसर पर पूरे दिनभर उत्साह का माहौल दिखाई देता है। रात्रि 12 बजे ये उत्साह दोगुना हो जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर रात्रि 12 बजे रिसाला चौक में परंपरानुसार दो तोपों से 21 बार सलामी दी जाती है। तोपों की ये गूंज इतनी तेज होती है कि आसपास के कई गांवों में श्रद्धालु कान्हा के जन्म की खुशी में शामिल हो जाते हैं। ये परम्परा 350 सालों से अधिक समय से निभाई जा रही है।
एक तरफ तोपों की गूंज सुनाई देती है तो दूसरी तरफ श्रद्धालुओं के गगनभेदी भगवान कृष्ण के जयघोष। इस नजारे को देखने के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों से एवं विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के श्रीनाथजी के भक्त जन्माष्टमी उत्सव के लिए श्रीनाथजी पहुंचते हैं।