सरिस्का बाघ अभयारण्य के बाघ विहीन होने से शर्मसार हुआ राजस्थान अब रणथम्भौर बाघ अभ्यारण्य में दस बाघों के लापता होने से फिर चर्चा में हैं।
रणथम्भौर उद्यान से पिछले तीन सालों में दस बाघ गायब हुए हैं। वर्तमान में बाघ टी-29, 21, 40 और बाघिन 14, 31, 27, 17, 16 व बाघिन टी-13 के दो शावक लापता चल रहे हैं।
इधर, सर्वाधिक दिखाई देने के कारण प्रकृति प्रेमियों और प्रर्यटकों में विख्यात मछली नाम की टी-17 बाघिन के लापता होने के बाद वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था कठघरे में खड़ी है। खास बात यह है कि रणम्भौर में 80 प्रतिशत तक बाघ-बाघिन मछली की संतान हैं।
वर्तमान में रणथम्भौर में शावकों सहित 46 बाघ-बाघिन हैं।
सूत्रों ने बताया कि गत 11 जनवरी से मछली लापता है और कुछ महीने पहले 15 जून 2013 को बाघिन सुंदरी (टी-17) रणथम्भौर उद्यान के कुण्डेरा रेंज से लापता हुई थी, जो मछली की ही संतान है।
सुंदरी तीन बच्चों को भी छोड़ गई थी। सुंदरी की तलाश में तत्कालीन वन मंत्री बीना काक भी दो-तीन दिन जुटी थी।
सूत्र अब यहां तक कहने लगे हैं कि कुण्डेरा रेंज में वन्यजीव सुरक्षित नहीं है। इसमें शिकार, खनन, कटाई और मानवीय अवैध घुसपैठ लगातार जारी है। रेंज में गत 7 सितंबर को शिकारियों ने चीतल का शिकार किया था।
उन्होंने शिकार में कुत्तों का इस्तेमाल भी किया। धाकड़ा क्षेत्र में जहां सुंदरी के तीन शावक विचरण करते हैं, वहां 26 जनवरी की शाम को धोक के हरे पेड़ों की कटाई करते कई लोग मिले थे।
हालांकि रणथम्भौर डीएफओ राहुल भटनागर के अनुसार कई बार शक्तिशाली बाघ या बाघिन संबंधित क्षेत्र में रहे रहे बाघ-बाघिन को घदेड़ देते हैं और खदेड़े गए बाघ-बाघिन अपना नया क्षेत्र बनाने के लिए इधर-उधर निकल जाते हैं।
शिकार की आशंका नहीं है। मछली और अन्य लापता हुए बाघ-बाघिनों को ढूंढने के लिए टीमें लगा दी गई हैं।